फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बीके सिविल अस्पताल से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद शर्मनाक और अमानवीय तस्वीर सामने आई है. टीबी से पीड़ित एक महिला की मौत के बाद उसके शव को एंबुलेंस या शव वाहन नहीं मिला. मजबूर होकर पति को अपनी पत्नी का शव ठेले पर रखकर घर ले जाना पड़ा.
मृत महिला की पहचान 35 वर्षीय सुमित्रा के रूप में हुई है. वह पिछले तीन महीनों से टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी.
उसका इलाज फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में चल रहा था. हालत बिगड़ने पर उसे सफदरजंग और एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया.
#BREAKING - फरीदाबाद में स्वास्थ्य सेवाओं की शर्मनाक हकीकत उजागर
— Risav Bajpayi (@jurnorisav) January 29, 2026
सिविल अस्पताल में महिला की मौत, शव ले जाने को नहीं मिली एंबुलेंस
टीवी पीड़ित महिला का शव ठेले पर ले जाने को मजबूर हुआ पति@DistrictAdm_FBD pic.twitter.com/26wWc8g08f
परिवार ने इलाज के लिए तीन से चार लाख रुपये तक खर्च कर दिए. जब पैसे खत्म हो गए, तो मजबूरी में सुमित्रा को दोबारा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया. बुधवार दोपहर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मौत के बाद परिवार को सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब शव ले जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं मिली.
मृतका का घर अस्पताल से महज सात किलोमीटर दूर सारण गांव में है. इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन एक भी सरकारी एंबुलेंस या शव वाहन उपलब्ध नहीं करा सका. पति गुनगुन ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल परिसर में इंतजार किया. इसके बाद भी कोई मदद नहीं मिली. सरकारी एंबुलेंस सेवा के दावे पूरी तरह खोखले साबित हुए. प्राइवेट एंबुलेंस चालकों ने सात किलोमीटर के लिए 500 से 700 रुपये मांगे. एक दिहाड़ी मजदूर के लिए इतनी रकम देना उस समय संभव नहीं था.
आखिरकार गुनगुन ने वही ठेला निकाला, जिससे वह रोज मजदूरी करता है. उसी ठेले पर पत्नी का शव रखकर वह अस्पताल से घर की ओर रवाना हुआ. इस दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद लोग भी मूकदर्शक बने रहे.
गुनगुन ने बताया कि अब उनके पास पत्नी के दाह संस्कार तक के पैसे नहीं हैं. इसके लिए भी उन्हें कर्ज लेना पड़ेगा. आठ साल का बेटा इस पूरी त्रासदी का गवाह बना रहा. मामले पर डिप्टी सिविल सर्जन ने कहा कि एंबुलेंस उनके अधीन आती है लेकिन शव वाहन की व्यवस्था रेड क्रॉस द्वारा की जाती है. उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है.