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19 साल पुराने चुनावी केस में दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने किया सरेंडर

दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने 19 साल पुराने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामले में मुजफ्फरनगर कोर्ट में सरेंडर किया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
19 साल पुराने चुनावी केस में दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने किया सरेंडर
Courtesy: X

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत में आत्मसमर्पण किया. यह मामला वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा है. लंबे समय तक अदालत में पेश न होने के कारण उनके खिलाफ वारंट जारी किए गए थे, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की.

कोर्ट ने दी जमानत

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कविता अग्रवाल की अदालत ने सुनवाई के दौरान अहमद बुखारी को जमानत प्रदान कर दी. अदालत ने 20-20 हजार रुपये के दो जमानत बांड जमा कराने की शर्त पर उन्हें राहत दी. सरेंडर के बाद अदालत में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं और मामले की आगे की सुनवाई के लिए अगली तारीख निर्धारित की गई.

2007 के चुनाव प्रचार से जुड़ा है मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 10 अप्रैल 2007 को खतौली थाना क्षेत्र में अहमद बुखारी और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. आरोप है कि वह हेलीकॉप्टर से खतौली पहुंचे और आवश्यक प्रशासनिक अनुमति लिए बिना एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया. पुलिस का कहना है कि यह उस समय लागू आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन था, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई.

इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा

यह मामला तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 171 और धारा 188 के तहत दर्ज किया गया था. धारा 171 चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ अपराधों से संबंधित है, जबकि धारा 188 सरकारी अधिकारी के वैध आदेश की अवज्ञा से जुड़ी है. अभियोजन का कहना है कि प्रशासनिक अनुमति के बिना सभा आयोजित किए जाने के कारण यह कार्रवाई की गई थी.

बार-बार अनुपस्थिति बनी वारंट की वजह

अभियोजन अधिकारी के अनुसार, अदालत की ओर से कई बार समन और जमानती वारंट जारी किए गए, लेकिन अहमद बुखारी निर्धारित तिथियों पर अदालत में उपस्थित नहीं हुए. लगातार गैर-हाजिरी के चलते अदालत ने उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया और वारंट जारी किए. आखिरकार, 19 वर्ष पुराने इस मामले में उन्होंने स्वयं अदालत पहुंचकर सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई और अब मामले की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी.