देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक बना हुआ है. रविवार सुबह शहर के कई इलाकों में जहरीली धुंध की मोटी चादर छाई रही. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सुबह 6 बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के 11 से ज्यादा इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया.
यह स्थिति लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है. पंजाबी बाग में AQI 450 तक पहुंच गया, जबकि आरके पुरम और IIT दिल्ली में भी प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक रहा.
CPCB के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके में सबसे अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया. यहां AQI 450 तक पहुंच गया. इसके बाद आरके पुरम में 449 और IIT दिल्ली में 446 AQI दर्ज किया गया. पश्चिमी दिल्ली के द्वारका इलाके में भी स्थिति गंभीर बनी रही, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 444 रिकॉर्ड किया गया.
इसके अलावा मथुरा रोड पर AQI 425, सिरीफोर्ट में 423 और दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में भी 423 दर्ज किया गया. पूसा में प्रदूषण का स्तर 415 रहा, जबकि चांदनी चौक में 417 रिकॉर्ड किया गया. बुराड़ी क्रॉसिंग पर AQI 411 और NSUT जाफरपुर में 409 दर्ज हुआ. इन सभी इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में बनी हुई है.
दिल्ली के कुछ इलाकों में AQI 400 से नीचे जरूर रहा, लेकिन वहां भी हवा की स्थिति राहत देने वाली नहीं है. नरेला में AQI 399, ITO में 396 और मंदिर मार्ग पर 393 दर्ज किया गया. वहीं उत्तम नगर में 373, बुराड़ी में 370 और तालकटोरा गार्डन में 369 AQI रिकॉर्ड हुआ.
आया नगर में भी प्रदूषण का स्तर 369 रहा. इसके अलावा वसुंधरा एन्क्लेव में 356, टिकरी कलां और बदरपुर में 349-349 दर्ज किया गया. कराला में AQI 337 और लोधी रोड के IITM स्टेशन पर 333 रिकॉर्ड हुआ. ये सभी इलाके बेहद खराब श्रेणी में शामिल हैं.
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का बढ़ता स्तर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. दीपावली से पहले ही हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच गई है. प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण की पाबंदियां लागू होने के बावजूद हालात में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दे रहा है.
लगातार खराब हवा का असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर अधिक पड़ सकता है. आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए और बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए. दिल्ली की हवा में सुधार के लिए प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण करना बेहद जरूरी है.