छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानूनी प्रक्रिया, सामाजिक मान्यताओं और व्यक्तिगत फैसलों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. जिस युवक को युवती की शिकायत के बाद दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, उसी युवक के साथ युवती ने अदालत की अनुमति मिलने के बाद जेल परिसर में सात फेरे लिए. युवती का दावा है कि उसने परिवार के दबाव में शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि दोनों लंबे समय से प्रेम संबंध में थे और विवाह करना चाहते थे.
जानकारी के अनुसार, परपा थाना क्षेत्र के राजूर गांव निवासी सुरेश सेठिया और युवती एक-दूसरे से प्रेम करते थे. दोनों बालिग थे और विवाह के इच्छुक थे, लेकिन अलग-अलग जातियों से होने के कारण परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था. पारिवारिक विरोध बढ़ने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत दुष्कर्म का मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
युवक के जेल जाने के बाद युवती ने स्वयं अदालत में आवेदन देकर कहा कि वह अपनी इच्छा से सुरेश के साथ रहना और विवाह करना चाहती है. उसने न्यायालय को बताया कि प्राथमिकी परिवार के दबाव में दर्ज कराई गई थी. युवती ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों बालिग हैं और अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं. इस बयान के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया.
युवती की बात सुनने के बाद अदालत ने पुलिस और जेल प्रशासन को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर विवाह कराने के निर्देश दिए. दोनों की सहमति से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए और सभी औपचारिकताओं के बाद जगदलपुर केंद्रीय जेल परिसर में विवाह की व्यवस्था की गई. पुलिस अधिकारियों, अधिवक्ताओं और मीडिया की मौजूदगी में दोनों ने विधि-विधान से सात फेरे लेकर अपने रिश्ते को वैधानिक रूप दिया.
केंद्रीय जेल के जेलर एस.एल. नायर के अनुसार, सुरेश ने जेल में रहते हुए विवाह की इच्छा जताई थी. इसके बाद दोनों पक्षों से आवेदन प्राप्त किए गए और मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया. अदालत द्वारा अनुमति मिलने के बाद विवाह की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप संपन्न कराई गई. जेल प्रशासन का कहना है कि यह केंद्रीय जेल परिसर में आयोजित इस तरह का पहला विवाह है.
जेल प्रशासन के मुताबिक, दोनों परिवारों का रुख एक जैसा नहीं था. युवती के परिजनों ने प्रक्रिया में सहयोग किया, जबकि युवक के परिवार के कुछ सदस्यों ने अंतरजातीय विवाह का विरोध जारी रखा. इसके बावजूद दोनों के बालिग होने और आपसी सहमति को प्राथमिकता देते हुए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी. अब यह मामला प्रेम, कानून, पारिवारिक दबाव और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन की मिसाल के रूप में पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.