रायपुर: छत्तीसगढ़ के अत्यधिक चर्चित शराब घोटाला मामले में बुधवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया. आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने रायपुर की विशेष अदालत में 1500 पन्नों का आठवां पूरक चालान दाखिल किया, जिसके बाद लंबे समय से जेल में बंद सौम्या चौरसिया और तांत्रिक केके श्रीवास्तव को सशर्त जमानत के आधार पर रिहा कर दिया गया. इस मामले में अब तक कई राजनेता, अधिकारी और कारोबारी गिरफ्त में आ चुके हैं, जबकि जांच एजेंसी ने भविष्य में और अभियोग पत्र दायर करने के संकेत दिए हैं.
EOW द्वारा दाखिल किए गए आठवें पूरक चालान में घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और विभिन्न आरोपियों की कथित भूमिकाओं का विस्तार से उल्लेख है. अदालत में चालान प्रस्तुत होते ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रही सौम्या चौरसिया की रिहाई का रास्ता साफ हो गया. उन्हें पिछले महीने ही उच्च न्यायालय से सशर्त जमानत मिली थी, जिसमें कहा गया था कि चालान पेश होने के दिन उन्हें रिहा किया जाए. अदालत के निर्देशों के अनुसार बुधवार को उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी कर ली गई. इसी तरह केके श्रीवास्तव को भी जमानत पर मुक्त कर दिया गया.
जांच एजेंसी के अनुसार, घोटाले में देवेंद्र डडसेना की भूमिका अवैध धन के प्रबंधन, सुरक्षित रखने और निर्देशानुसार आगे भेजने से जुड़ी रही. EOW की रिपोर्ट में कहा गया है कि डडसेना ने सिंडिकेट के आर्थिक संचालन को सक्षम बनाने में सक्रिय रूप से सहयोग किया था. अलग-अलग स्रोतों से आने वाली राशि को वह सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाता था. एजेंसी का दावा है कि उसकी गतिविधियों के कारण इस कथित नेटवर्क को बड़ी वित्तीय मदद मिली, और इसी आधार पर डडसेना को आरोपियों की सूची में शामिल किया गया है.
जमानत पर रिहा हुई सौम्या चौरसिया पर आरोप है कि उन्होंने अपने शासकीय पद का दुरुपयोग कर कथित सिंडिकेट को संरक्षण, प्रशासनिक मदद और समन्वय उपलब्ध कराया. EOW का कहना है कि इस सहयोग से राज्य को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ. वहीं केके श्रीवास्तव पर नकदी के संग्रहण, परिवहन, प्रबंधन और निवेश में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है. एजेंसी ने बताया कि श्रीवास्तव ने अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल कर अवैध आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया था.
जेल से बाहर आने के बाद केके श्रीवास्तव ने मीडिया से कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए वे किसी भी टिप्पणी से बचना चाहेंगे. उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि उनका कई राजनीतिक दलों के नेताओं से व्यक्तिगत संबंध रहा है, लेकिन वे किसी भी पार्टी के सदस्य नहीं हैं. EOW ने दोहराया है कि जांच अभी भी जारी है और शासकीय, अशासकीय, राजनीतिक तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर और पूरक चालान दाखिल किए जाएंगे.