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हत्या में इस्तेमाल चाकू की होम डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों पर FIR रद्द करने से कोर्ट का इनकार, फ्लिपकार्ट से किया था ऑर्डर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लॉजिस्टिक्स कंपनी इलास्टिक रन (ElasticRun) के दो कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया है. ये कर्मचारी उस चाकू की डिलीवरी में शामिल थे, जिसे ऑनलाइन खरीदा गया था और बाद में एक पेट्रोल पंप पर हत्या और लूट की वारदात में इस्तेमाल किया गया. अदालत ने कहा कि जांच जारी रहने देना आवश्यक है और एफआईआर को रद्द करना उचित नहीं होगा.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
हत्या में इस्तेमाल चाकू की होम डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों पर FIR रद्द करने से कोर्ट का इनकार, फ्लिपकार्ट से किया था ऑर्डर
Courtesy: web

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के माध्यम से भेजे जाने वाले पार्सलों की सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर एक अहम मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सामने आया. इस मामले में कोर्ट ने साफ किया कि यदि किसी प्रतिबंधित वस्तु की डिलीवरी में संलिप्तता का आरोप है, तो उसकी जांच पूरी तरह से होनी चाहिए. अदालत ने कहा कि इस स्तर पर एफआईआर को खारिज करना न्यायसंगत नहीं होगा.

दरअसल 17 जुलाई को रायपुर जिले के मंदिर हसौद क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप पर हत्या और लूट की घटना हुई थी. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों समीर टंडन और कुणाल तिवारी ने फ्लिपकार्ट से एक चाकू ऑनलाइन खरीदा था. यह चाकू आर्म्स एक्ट के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में आता है. आरोप है कि इसी चाकू का इस्तेमाल हत्या और लूट में किया गया. इसके बाद इलास्टिक रन कंपनी के दो कर्मचारियों, दिनेश साहू और हरिशंकर साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, क्योंकि उन्होंने पैकेज डिलीवर किया था.

कर्मचारियों ने क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं के वकील देवाशीष तिवारी ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल केवल सील पैकेज डिलीवर करने के लिए जिम्मेदार थे और उन्हें इसके अंदर मौजूद सामान या खरीदार की मंशा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि इलास्टिक रन का फ्लिपकार्ट की लॉजिस्टिक्स शाखा इंस्टाकार्ट सर्विसेज से अनुबंध है, जिसके तहत कर्मचारी पैकेज को खोले बिना सीधा डिलीवर करने के लिए बाध्य हैं. साथ ही, आईटी एक्ट 2000 के तहत फ्लिपकार्ट ‘इंटरमीडियरी’ की श्रेणी में आता है और इसे ‘सेफ हार्बर’ का संरक्षण प्राप्त है.

सरकार का पक्ष क्या है?

सरकारी वकील सौम्या शर्मा ने दलील दी कि चाकू एक प्रतिबंधित वस्तु थी और कर्मचारियों को केवल अज्ञानता का हवाला देकर जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने याद दिलाया कि 17 अक्टूबर 2024 को एंटी-क्राइम एंड साइबर यूनिट, बिलासपुर ने अमेज़न, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और शॉपक्लूज़ जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को चेतावनी दी थी कि वे किचन नाइफ को छोड़कर किसी भी प्रकार के चाकू की बिक्री न करें.

हाईकोर्ट का फैसला

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट आमतौर पर संज्ञेय अपराधों की जांच में हस्तक्षेप नहीं करता. एफआईआर में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि प्रतिबंधित चाकू फ्लिपकार्ट से मंगवाया गया और इलास्टिक रन की लॉजिस्टिक्स चेन से डिलीवर हुआ. अदालत ने कहा कि कर्मचारियों की जानकारी, लापरवाही और आईटी एक्ट के तहत संरक्षण मिलने जैसे सवाल जांच के विषय हैं. इसलिए इस स्तर पर एफआईआर को खारिज करना उचित नहीं होगा.