नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका में बड़ी राजनीतिक हलचल मच गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के निदेशक जोसेफ केंट ने अचानक इस्तीफा दे दिया है. उनका इस्तीफा ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध से जुड़ा है. केंट ने अपने पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा कि ईरान अमेरिका के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं था, लेकिन इजरायल और वाशिंगटन में उसकी मजबूत लॉबी के दबाव में यह युद्ध शुरू हुआ. यह कदम अमेरिकी नीति पर सवाल खड़े कर रहा है.
जोसेफ केंट ने एक्स पर पोस्ट कर इस्तीफा की जानकारी दी. उन्होंने लिखा, 'गहन विचार के बाद मैं आज से राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के निदेशक पद से इस्तीफा दे रहा हूं.' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला ईरान युद्ध के विरोध में लिया गया है. केंट ने कहा कि वह अच्छे विवेक से इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते. उनका यह कदम वाशिंगटन में चर्चा का विषय बन गया है.
केंट ने अपने इस्तीफा पत्र में जोर देकर कहा कि ईरान से अमेरिका को कोई 'तत्काल खतरा' नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि युद्ध की शुरुआत इजरायल और उसके अमेरिकी लॉबी के दबाव से हुई. केंट का मानना है कि ट्रंप जून 2025 तक मध्य पूर्व युद्धों को अमेरिकी संसाधनों और जानों के लिए हानिकारक मानते थे, लेकिन बाद में रुख बदल गया.
After much reflection, I have decided to resign from my position as Director of the National Counterterrorism Center, effective today.
— Joe Kent (@joekent16jan19) March 17, 2026
I cannot in good conscience support the ongoing war in Iran. Iran posed no imminent threat to our nation, and it is clear that we started this… pic.twitter.com/prtu86DpEr
उन्होंने दावा किया कि इजरायली वरिष्ठ अधिकारी और अमेरिकी मीडिया के कुछ प्रभावशाली लोग गलत सूचना फैला रहे थे. उनका कहना था कि यह 'मिसइनफॉर्मेशन कैंपेन' अमेरिका को ईरान से टकराव की ओर धकेलने के लिए चलाया गया. केंट ने इसे युद्ध का मुख्य कारण बताया और कहा कि इससे अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा है.
राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के प्रमुख के तौर पर केंट का काम आतंकवादी खतरों का विश्लेषण और पहचान करना था. उनका इस्तीफा इस बात को रेखांकित करता है कि अमेरिकी खुफिया तंत्र के शीर्ष अधिकारी भी युद्ध की नीति से असहमत हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना ट्रंप प्रशासन के अंदर गहरे मतभेदों को उजागर करती है.