बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को नक्सलवाद के खिलाफ एक और बड़ी सफलता मिली है. शनिवार को जिले के उत्तर-पश्चिमी पहाड़ी जंगलों में माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें दो नक्सली मारे गए. घटनास्थल से उनके शव और हथियार बरामद किए गए हैं. फिलहाल इलाके में रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है और सर्च ऑपरेशन चल रहा है.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार नक्सलियों की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिलने पर डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी), एसटीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम एंटी-नक्सल अभियान पर निकली थी. सुबह तड़के जंगलों में जवानों और माओवादियों के बीच भिड़ंत शुरू हो गई. जवानों की सतर्कता और जवाबी कार्रवाई से दो नक्सली ढेर हो गए. मारे गए नक्सलियों की पहचान और उनके पद की जांच जारी है. यह घटना केंद्र सरकार के उस बड़े लक्ष्य का हिस्सा है, जिसमें 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया गया है.
गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार इस समयसीमा की बात दोहराई है. पिछले कुछ महीनों में बीजापुर और बस्तर क्षेत्र में लगातार ऑपरेशन चल रहे हैं, जिससे नक्सली संगठन कमजोर हो रहा है. कई नक्सली कमांडरों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि दर्जनों मारे गए हैं. पिछले साल (2025) छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ों में कुल 285 नक्सली मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर बस्तर संभाग (बीजापुर समेत 7 जिले) में थे. इसी साल की शुरुआत में भी सुकमा-बीजापुर में कई सफल ऑपरेशन हुए, जहां कुल 14 नक्सली ढेर किए गए.
बताते चलें कि तीन जनवरी को बस्तर क्षेत्र में दो मुठभेड़ों में 14 नक्सली मारे गए थे. इन अभियानों से नक्सलियों की आपूर्ति लाइनें टूट रही हैं और वे घेराबंदी में हैं. बीजापुर का यह इलाका नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में से एक है, जहां घने जंगल और पहाड़ियां नक्सलियों को छिपने में मदद करती हैं. लेकिन सुरक्षा बलों की बढ़ती क्षमता, ड्रोन और इंटेलिजेंस के दम पर अब स्थिति बदल रही है. अधिकारी बताते हैं कि मुठभेड़ में इस्तेमाल हथियारों से पता चलता है कि नक्सली अभी भी संगठित हैं, लेकिन उनकी ताकत घट रही है. यह सफलता सुरक्षाबलों के लिए उत्साहजनक है, लेकिन गोलीबारी जारी होने से इलाके में सतर्कता बरती जा रही है.