बस्तर: आजादी के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के 41 गांवों में गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा, जिसे एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण माना जा रहा है. इन गांवों में पहली बार 26 जनवरी को तिरंगा फहराया जाएगा, जो दशकों तक माओवादी हिंसा और डर के साये में रहे थे.
यह बदलाव माओवाद के कमजोर पड़ने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ने से संभव हो पाया है. इन 41 गांवों में 13 गांव बीजापुर जिले में, 18 गांव नारायणपुर जिले में और 10 गांव सुकमा जिले में स्थित हैं. बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने जानकारी दी कि आजादी के बाद यह पहला मौका है, जब इन गांवों में गणतंत्र दिवस का आयोजन होगा.
उन्होंने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि शांति, लोकतंत्र और संविधान की जीत का प्रतीक है. आईजी के अनुसार ये गांव दशकों तक राष्ट्रीय पर्वों और लोकतांत्रिक गतिविधियों से पूरी तरह कटे हुए थे. अब इन क्षेत्रों में लोगों का देश और संविधान के प्रति विश्वास लौट रहा है.
पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. सुरक्षा कैंपों के कारण न केवल माओवादी प्रभाव कमजोर हुआ है, बल्कि शासन और प्रशासन की मौजूदगी भी मजबूत हुई है.
स्थानीय लोगों में अब डर की जगह भरोसा और विकास की उम्मीद दिखाई देने लगी है. आईजी सुंदरराज ने बताया कि पिछले वर्ष 15 अगस्त को भी 13 गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था. इन गांवों को मिलाकर अब कुल 54 गांव ऐसे हो जाएंगे, जहां पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा.
वरिष्ठ माओवादी नेताओं के निष्प्रभावी होने से उग्रवाद को बड़ा झटका लगा है. अभुजमाड़ और नेशनल पार्क क्षेत्र में बसवराजू, के रामचंद्र रेड्डी, सुधाकर और कट्टा सत्यनारायण रेड्डी जैसे नेताओं के मारे जाने से माओवादी नेटवर्क कमजोर पड़ा है.
इसका सीधा असर स्थानीय जीवन पर पड़ा है और लोग सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं. इन गांवों में नियद नेल्लानार योजना के तहत आदिवासी समुदायों तक सरकारी योजनाएं, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं.
राज्य सरकार का कहना है कि गणतंत्र दिवस का यह आयोजन लोकतंत्र और कानून के शासन की मजबूत होती जड़ों को दर्शाता है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्यभर में गणतंत्र दिवस की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. राज्यपाल रमेन डेका रायपुर में और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बिलासपुर में झंडारोहण करेंगे. यह दिन बस्तर के लिए नई शुरुआत और उम्मीद का प्रतीक बनकर सामने आया है.