पटना: बिहार में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है. राज्य कैबिनेट ने पटना से चार प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कराने की मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और मत्स्य पालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई. इन फैसलों का उद्देश्य राज्य के विकास को नई गति देना है.
कैबिनेट ने पटना से मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, आरा और गया तक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम विकसित करने के लिए एएआर और डीपीआर तैयार करने की मंजूरी दी है. पटना-मुजफ्फरपुर कॉरिडोर हाजीपुर और सोनपुर होकर गुजरेगा. सरकार का कहना है कि इससे तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित होगी.
सरकार ने इस परियोजना का डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम को सौंपी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगी. साथ ही आर्थिक गतिविधियों और शहरी विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी.
राज्य कैबिनेट ने पटना एम्स के विस्तार के लिए दानापुर के भूसौला क्षेत्र में 26.76 एकड़ भूमि अधिग्रहण को मंजूरी दी है. इस परियोजना पर करीब 348.90 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और शोध को बड़ा लाभ मिलेगा.
मधुबनी, मुंगेर और मुजफ्फरपुर में नए केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने के लिए पांच-पांच एकड़ जमीन केंद्र सरकार को 30 वर्ष की टोकन लीज पर देने का फैसला लिया गया है. सरकार का कहना है कि इससे इन जिलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर और मजबूत होंगे.
कैबिनेट ने बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के गठन को भी मंजूरी दी है. सरकार के अनुसार यह संस्था आधुनिक मत्स्य अवसंरचना विकसित करने, निवेश बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.