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India Daily

Bihar Chunav: पीएम मोदी के मंच पर पप्पू यादव को मिली जगह, फुसफुसाहाट और हंसी ने उड़ाई राहुल-तेजस्वी की नींद

15 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी बिहार पहुंचे और पूर्णिया में करीब 36,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत की. इनमें पूर्णिया एयरपोर्ट का उद्घाटन सबसे प्रमुख था, जो सीमांचल क्षेत्र के लिए लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है. मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए के अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे. इसी बीच, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव मंच पर पहुंचे और पीएम मोदी के करीब जाकर उनसे बात की.

Gyanendra Sharma
Bihar Chunav: पीएम मोदी के मंच पर पप्पू यादव को मिली जगह, फुसफुसाहाट और हंसी ने उड़ाई राहुल-तेजस्वी की नींद
Courtesy: Social Media

Bihar Chunav: बिहार में विधानसभा चुनाव इसी साल होने हैं. पीएम मोदी सोमवार को  सीमांचल के पूर्णिया में थे. मंच पर वहां के सांसद पप्पू यादव मौजूद थे. निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की मौजूदगी और उनके बीच हुई हल्की-फुल्की बातचीत ने अटकलों का दौर चला दिया है. पूर्णिया एयरपोर्ट के उद्घाटन के अवसर पर हुए इस दृश्य ने विपक्षी खेमे में हड़कंप मचा दिया है, जबकि एनडीए के समर्थक इसे विकास की जीत बता रहे हैं. आखिर क्या है इस मुलाकात का राज? 

15 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी बिहार पहुंचे और पूर्णिया में करीब 36,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत की. इनमें पूर्णिया एयरपोर्ट का उद्घाटन सबसे प्रमुख था, जो सीमांचल क्षेत्र के लिए लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है. मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए के अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे. इसी बीच, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव मंच पर पहुंचे और पीएम मोदी के करीब जाकर उनसे बात की. वीडियो फुटेज में साफ दिखा कि पप्पू यादव ने पीएम के कान में कुछ फुसफुसाया, जिस पर मोदी जी मुस्कुराए और हल्का ठहाका लगाया. पप्पू यादव भी उत्साहित नजर आए और उन्होंने मंच से ही विकास कार्यों की सराहना की.

इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि आखिर एक निर्दलीय सांसद, जो खुद को कांग्रेस और महागठबंधन का समर्थक बताते हैं, एनडीए के मंच पर क्यों पहुंचे? बीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह कोई चुनावी रैली नहीं, बल्कि विकास कार्यक्रम था, इसलिए स्थानीय सांसद की उपस्थिति स्वाभाविक है. लेकिन विपक्ष के लिए यह एक बड़ा सवाल बन गया है.

 पप्पू यादव की राजनीतिक यात्रा

पप्पू यादव बिहार की राजनीति के एक चर्चित चेहरे हैं, खासकर सीमांचल और कोशी क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ किसी से छुपी नहीं. हाल के लोकसभा चुनावों में पूर्णिया सीट पर उन्होंने निर्दलीय के तौर पर जीत हासिल की, जो बिहार की सबसे कठिन लड़ाई वाली सीटों में से एक थी. यहां राजद की बीमा भारती और एनडीए के उम्मीदवार के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था, लेकिन पप्पू यादव ने अपनी जनाधार की बदौलत बाजी मार ली. तेजस्वी यादव ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था, फिर भी पप्पू की जीत ने उनकी अलग पहचान कायम की.

महागठबंधन में नहीं मिली जगह

चुनाव के बाद पप्पू यादव ने कांग्रेस से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की. वे खुद को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का 'सिपाही' बताते रहे, लेकिन महागठबंधन में उनकी जगह को लेकर असमंजस बना हुआ है. राजद के साथ मतभेद और गठबंधन की रणनीति ने उन्हें अलग-थलग महसूस कराया. ऐसे में, एनडीए के मंच पर उनकी मौजूदगी ने सवालों को जन्म दिया है. क्या वे किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं, या यह सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर बातचीत थी?

वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि पप्पू यादव जैसे निर्दलीय नेता का जनाधार एनडीए या महागठबंधन दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. एक प्रमुख मीडिया हाउस के अनुसार, पीएम मोदी ने मंच पर पप्पू को सम्मान दिया, क्योंकि वे जानते हैं कि सीमांचल में उनकी पकड़ मजबूत है. अगर कोई निर्दलीय जीतता है, तो उसका वोट बैंक गठबंधनों के लिए चुनौती बन सकता है.