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India Daily

'समंदर में डुबो दो' 24 दिन,10 मैच, सिर्फ 1 जीत... क्या फिर सच साबित हो रहा है बिशन सिंह बेदी का 36 साल पुराना बयान?

आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर लगातार हार के बाद टीम इंडिया का प्रदर्शन सवालों के घेरे में है. 24 दिनों में 10 मैचों में सिर्फ एक जीत ने 36 साल पुराने विवादित बयान की याद फिर ताजा कर दी.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
'समंदर में डुबो दो' 24 दिन,10 मैच, सिर्फ 1 जीत... क्या फिर सच साबित हो रहा है बिशन सिंह बेदी का 36 साल पुराना बयान?
Courtesy: X (@rohshh45)

विश्व की नंबर वन टी20 टीम, 24 दिन... 10 मैच... और महज एक जीत. ये केवल भारतीय टीम की मौजूदा कहानी नहीं है बल्कि भारत को पिछले 24 दिनों में दिया गया वो जख्म है जिसे भारत कभी भी नहीं भूल पाएगा. भारत हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरे पर था. इन दोनों दौरों में भारत आयरलैंड T20 से 2-0 से हार, इंग्लैंड टी20 सीरीज में 4-0 से हारा और इंग्लैंड वनडे सीरीज में 2-1 से हारा. 

लगातार मिल रही हार ने भारतीय क्रिकेट के एक पुराने अध्याय को फिर चर्चा में ला दिया है. 36 साल पहले बिशन सिंह बेदी का दिया गया बयान 'इस टीम को समंदर में डुबो दो.' एक बार फिर क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

10 मैच... सिर्फ 1 जीत... 

भारतीय टीम ने विदेशी दौरे पर कुल 10 मुकाबले खेले और सिर्फ एक मैच जीत सकी. आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 0-2 से गंवाने के बाद इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 0-4 से हार मिली. इसके बाद वनडे सीरीज भी 1-2 से हाथ से निकल गई. यह प्रदर्शन टीम की तैयारियों और रणनीति पर सवाल खड़े करता है.

क्यों याद आया बेदी का बयान

दरअसल साल 1990 में न्यूजीलैंड दौरे पर खराब प्रदर्शन के बाद तत्कालीन टीम मैनेजर बिशन सिंह बेदी ने गुस्से में कहा था कि भारतीय टीम को लौटते समय प्रशांत महासागर में डुबो देना चाहिए. यह बयान भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित और विवादित बयानों में शामिल है. टीम की मौजूदा हालत भी उस समय से इतर नहीं है, जिस कारण उस को भारत की स्थिति में याद किया जा रहा है. 

बैटिंग, बॉलिंग, फिल्डिंग तीनों ही रही फ्लॉप

लगातार तीन सीरीज में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभाग उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे. तीनों ही क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन फ्लॉप रहा. कई मुकाबलों में भारतीय टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखाई दी और वापसी का जज्बा भी नजर नहीं आया. यही कारण है कि हार से ज्यादा उसके तरीके पर चर्चा हो रही है.

1990 और आज के दौर में अंतर

दोनों दौर की परिस्थितियां अलग हैं. आज भारतीय क्रिकेट के पास बेहतर संसाधन, आधुनिक तकनीक, बड़ा सपोर्ट स्टाफ और मजबूत बेंच स्ट्रेंथ मौजूद है. ऐसे में लगातार खराब प्रदर्शन स्वाभाविक रूप से ज्यादा निराश करता है. इसलिए टीम प्रबंधन से भी ज्यादा जवाबदेही की उम्मीद की जा रही है.