ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व 125 एथलीट करेंगे. इस दल में पैरा-स्पोर्ट्स समेत 13 खेलों के 77 पुरुष और 48 महिला एथलीट शामिल हैं.
एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा 32 खिलाड़ी (10 महिला और 22 पुरुष) शामिल हैं, इसके बाद बॉक्सिंग (14), जूडो (14) और वेटलिफ्टिंग (12) का नंबर आता है. बर्मिंघम में हुए 2022 CWG में भारत ने 210 एथलीट भेजे थे और 61 मेडल जीते थे. हालांकि, उस एडिशन में क्रिकेट, बैडमिंटन, हॉकी, स्क्वैश, टेबल टेनिस और रेसलिंग जैसे खेल भी शामिल थे, जिनसे कुल मिलाकर 30 मेडल मिले थे.
यह पारंपरिक बास्केटबॉल का तेज और छोटा फॉर्मेट है, जिसमें भारतीय महिला व्हीलचेयर टीम देश का प्रतिनिधित्व कर रही है. इसमें कम समय में ज्यादा रोमांच और तेजी से स्कोरिंग देखने को मिलती है.
यह खेल शरीर के संतुलन, लचीलेपन और ताकत की अद्भुत मिसाल है, जिसमें पुरुष और महिला दोनों वर्ग के जिम्नास्ट फ्लोर और उपकरण आधारित प्रदर्शन करते हैं. इसमें भारतीय खिलाड़ी अपनी कलात्मक और कठिन कलाबाजियों का प्रदर्शन करेंगे.
ट्रैक इवेंट्स में दौड़, बाधा दौड़ और रेस वॉक जैसे मुकाबले शामिल होते हैं, जहां एथलीटों की रफ़्तार और स्टैमिना की कड़ी परीक्षा होती है. भारत के कई तेज धावक इस स्पर्धा में पदक जीतने के प्रबल दावेदार हैं.
इसमें ऊंची कूद, लंबी कूद, पोल वॉल्ट, गोला फेंक और जैवलिन थ्रो जैसे नीरज चोपड़ा का इवेंट देखने को मिलेंगे. यह शक्ति और तकनीक का एक बेहतरीन मेल है.
दिव्यांग एथलीटों के लिए यह मंच उनकी अदम्य इच्छाशक्ति और खेल के प्रति जज्बे को दुनिया के सामने रखता है. इसमें भारतीय पैरा एथलीट ट्रैक और फील्ड दोनों ही श्रेणियों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने उतरेंगे.
यह सटीकता और एकाग्रता का खेल है, जिसमें खिलाड़ी एक छोटे लक्ष्य (जैक) के पास अपनी बाउल (गेंद) को पहुंचाने की कोशिश करते हैं. इस खेल में पिछले कुछ सालों में भारत का प्रदर्शन काफी शानदार रहा है.
मुक्केबाजी ताकत, फुर्ती और रणनीति का एक हाई-वोल्टेज खेल है, जिसमें भारतीय रिंग में अपने मुक्कों से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने उतरेंगे. लवलीना बोरगोहाईं जैसे दिग्गज इस दल की अगुवाई कर रहे हैं.
यह जापानी मार्शल आर्ट का एक रूप है, जिसमें दांव-पेंच और पकड़ के जरिए प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर गिराया जाता है. भारतीय जूडो खिलाड़ी अपनी ताकत और तकनीक के दम पर इस बार पोडियम फिनिश पर नजर बनाए हुए हैं.
यह दिव्यांग एथलीटों की बेजोड़ ताकत और हौसले का इम्तिहान लेने वाला खेल है, जिसमें खिलाड़ी बेंच प्रेस के जरिए भारी वजन उठाते हैं. भारतीय पावरलिफ्टर्स से इस बार पदक की मजबूत उम्मीदें हैं.
पानी के अंदर स्पीड और स्टैमिना का यह खेल कई अलग-अलग स्ट्रोक्स (जैसे बैकस्ट्राॅक, बटरफ्लाय) में खेला जाता है. श्रीहरि नटराज और साजन प्रकाश जैसे तैराक इस अभियान का मुख्य हिस्सा हैं.
वेलोड्रोम के लकड़ी या कंक्रीट के झुके हुए ट्रैक पर साइकिल की रफ्तार का यह रोमांचक मुकाबला होता है. रोनाल्डो सिंह और अन्य राइडर्स इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की ताकत दिखाएंगे.
यह विशुद्ध रूप से ताकत और तकनीक का खेल है, जहां स्नैच और क्लीन एंड जर्क में भारी वजन उठाया जाता है. मीराबाई चानू की अगुवाई में यह भारत के लिए सबसे भरोसेमंद पदक देने वाले खेलों में से एक है.