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Saransh Jain Story: 'बेटा, अच्छा खेलेगा तो मैं ठीक हो जाऊंगा'... पिता की इस पर्ची ने बदल दी सारांश जैन की जिंदगी

भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार चुने गए सारांश जैन की सफलता सिर्फ क्रिकेट की उपलब्धि नहीं है. यह उनके पिता के अधूरे सपने, कैंसर से संघर्ष और बेटे की मेहनत, धैर्य और विश्वास की कहानी भी है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
Saransh Jain Story: 'बेटा, अच्छा खेलेगा तो मैं ठीक हो जाऊंगा'... पिता की इस पर्ची ने बदल दी सारांश जैन की जिंदगी
Courtesy: X (@ImTanujSingh)

मंगलवार की सुबह BCCI मे श्रीलंका के खिलाफ 2 मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है. बोर्ड द्वारा घोषित इस टीम में एक नए चेहरे को मौका दिया गया है. 33 वर्षीय सारांश जैन पहली बार टेस्ट टीम में चुने गए हैं. इस उपलब्धि के पीछे सिर्फ शानदार प्रदर्शन नहीं, बल्कि सालों का संघर्ष और पिता के सपने को पूरा करने का जुनून छिपा है. कैंसर से जूझ रहे पिता के एक छोटे से संदेश ने सारांश को कभी हार नहीं मानने की ताकत दी. अब उनकी मेहनत ने उन्हें भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचा दिया है. 

पिता का संदेश बना सबसे बड़ी ताकत

बता दें साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मौजूद सारांश जैन को घर से पिता की बीमारी की सच्चाई नहीं बताई गई थी. भारत लौटने पर उन्होंने देखा कि उनके पिता सुबोध जैन मुंह के कैंसर से जूझ रहे हैं और बोलने की स्थिति में भी नहीं हैं. उस समय पिता ने कागज पर लिखा, 'बेटा, तू जितना अच्छा करेगा, मैं उतनी जल्दी ठीक हो जाऊंगा.' यही शब्द उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गए. 

अधूरा सपना बेटे ने किया पूरा

सुबोध जैन खुद मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके थे, लेकिन भारत की ओर से खेलने का सपना पूरा नहीं कर पाए. उन्होंने बचपन से ही सारांश को ऑफ स्पिन की बारीकियां सिखाईं और क्रिकेट के लिए तैयार किया. मंगलवार को जब सारांश के भारतीय टेस्ट टीम में चयन की घोषणा हुई, तब पिता का वर्षों पुराना सपना आखिरकार बेटे के जरिए पूरा हो गया.

संघर्ष ने बनाया मजबूत खिलाड़ी

सारांश का क्रिकेट सफर आसान नहीं रहा. रणजी ट्रॉफी के पहले ही मैच में पांच विकेट लेने के बावजूद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया और हर मौके को अपनी काबिलियत साबित करने का जरिया बनाया.

घरेलू क्रिकेट से मिली पहचान

दलीप ट्रॉफी में 16 विकेट और ईरानी कप में प्रभावशाली प्रदर्शन ने सारांश को नई पहचान दिलाई. रणजी ट्रॉफी में मध्य प्रदेश की सफलता में भी उनकी अहम भूमिका रही. लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण चयनकर्ताओं का भरोसा उन पर बढ़ता गया और आखिरकार उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिल गई.

सिर्फ चयन नहीं, एक प्रेरणा की कहानी

सारांश जैन का टीम इंडिया तक पहुंचना केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं है. यह उस पिता के विश्वास की जीत है, जिसने बीमारी के बीच भी बेटे का हौसला बनाए रखा. यह कहानी बताती है कि कठिन हालात चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, अगर मेहनत और विश्वास कायम रहे तो सपने एक दिन जरूर पूरे होते हैं.