मनु भाकर ने रविवार को पेरिस ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतकर भारत को पेरिस ओलंपिक में पहला मेडल दिलाया. वह निशानेबाजी में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं. शूटिंग में मेडल जीतकर मनु ने 12 साल के सूखे को खत्म किया. इससे पहले 2012 के लंदन ओलंपिक में शूटिंग में भारत को मेडल मिला था. विजय कुमार ने लंदन ओलंपिक में निशानेबाजी में भारत को रजत पदक दिलाया था. मेडल जीतने के बाद मनु भाकर ने कहा कि निशाना लगाने के अंतिम क्षण में उन्हें गीता याद आ रही थी.
मनु भाकर पिछले 7 साल से निशानेबाजी कर रही हैं. टोक्यो ओलंपिक में भी उन्होंने भाग लिया था लेकिन बंदूक में खराबी आने से वह बाहर हो गई थीं. उन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में साल 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेकर 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा भारत को गोल्ड मेडल जिताया था. मनु ने 2018 ISSF वर्ल्ड कप में 2 स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था.
जब मनु भाकर पेरिस ओलंपिक में अपना आखिरी शॉट लगा रही थी तो उन्हें धार्मिक ग्रंथ गीता की याद आ रही थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने गीता बहुत पढ़ी है. गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने जो उपदेश दिया था वह उपदेश उन्हें याद आ रहा था. गीता का सबसे लोकप्रिया उपदेश 'कर्म करो फल की चिंता मत करो' यह मनु भाकर को अंतिम क्षण में याद आ रहा था.
"I read a lot of Gita, focus on your process not the result, that was going through my mind in the final moment".
— Politics Pe Charcha (@politicscharcha) July 28, 2024
Congratulations Manu Bhakar pic.twitter.com/IXslLfUW1Q
22 साल की मनु भाकर ने देश के लिए मेडल जीतने के बाद बड़ी बात कही. उनसे आखिरी शॉट के बारे में पूछा गया कि उस वक्त किस तरह का दबाव महसूस हो हो रहा तो तो उन्होंने कहा- ‘जब मैं आखिरी शॉट्स खेल रही थीं तो मेरा फोकस क्लियर था. मैं गीता पढ़ती रही हूं. आखिरी शॉट के वक्त मेरे दिमाग में चल रहा था कि कर्म पर फोकस करो. रिजल्ट की चिंता मत करो.’
पेरिस ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतने पर मनु भाकर को देश भर से बधाई मिल रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायाब सिहं सैनी ने भी मेडल जीतने पर उन्हें बधाई दी. पूरा देश को मनु पर गर्व है. उन्होंने देश का नाम गर्व से ऊंचा करने का काम किया है.