27 साल के सरप्रीत सिंह ने 16 जून को लॉस एंजिल्स में ईरान के खिलाफ हुए मुकाबले में खेलकर इतिहास रच दिया. यह मैच 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ. सरप्रीत के लिए यह दिन यादगार बन गया, वे FIFA वर्ल्ड कप में उतरने वाले पहले सिख खिलाड़ी बने.
सैन डिएगो में टीम होटल में बातचीत के दौरान सरप्रीत सिंह ने अपने जज्बात साझा किए. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ उनकी निजी नहीं, उनके पूरे परिवार और समुदाय के लिए बहुत मायने रखती है. उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले खिलाड़ी बनकर बेहद खुश हैं और चाहते हैं कि आने वाले समय में और सिख, पंजाबी तथा भारतीय मूल के फुटबॉलर इस मंच तक पहुंचें. भारत अभी तक वर्ल्ड कप में जगह नहीं बना पाया है, इसलिए सरप्रीत की यह कामयाबी भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए खास मायने रखती है.
सिर्फ सरप्रीत ही नहीं, बल्कि कई और भारतीय मूल के खिलाड़ी अब अलग-अलग देशों की टीमों से खेल रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के फॉरवर्ड निशान वेलुपिल्ले, जिनकी मां दक्षिण भारत से ताल्लुक रखती हैं और कतर के विंगर तहसीन जमशीद भी इस टूर्नामेंट का हिस्सा हैं. इससे साफ पता चलता है कि दक्षिण एशियाई मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी विश्व फुटबॉल में लगातार बढ़ रही है. सरप्रीत ने यह भी याद किया कि कुछ साल पहले जब न्यूजीलैंड ने भारत में एक टूर्नामेंट खेला था, तब मिले प्यार ने उन्हें भारतीय फैंस के और करीब ला दिया था.
सरप्रीत सिंह की यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब फुटबॉल जगत में प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा तेज़ हो रही है. भारत भले ही अभी वर्ल्ड कप क्वालिफाई करने का इंतज़ार कर रहा हो लेकिन प्रवासी भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या इस खेल के प्रति बढ़ते जुनून को दिखाती है. न्यूजीलैंड अब 21 जून को वैंकूवर में ग्रुप G में मिस्र से भिड़ेगा, जहां टीम अपनी पहली जीत दर्ज करने की कोशिश करेगी. फैंस को सरप्रीत से एक बार फिर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी.