विराट कोहली 37 साल की उम्र में भी भारत के सबसे सक्रिय फील्डर्स में शामिल हैं. पूर्व फील्डिंग कोच टी. दिलीप के मुताबिक, कोहली की असली ताकत केवल उनके कैच या डाइव नहीं हैं. उनका मैदान पर लगातार मौजूद रहना और टीम को ऊर्जा देना भी उनके बड़े योगदान का हिस्सा है.
इंग्लैंड दौरे पर वनडे टीम में लौटे विराट कोहली मैदान पर पहले की तरह चुस्त नजर आए. वह गेंद के पीछे भागने, डाइव लगाने और हर गेंद पर ध्यान रखने से पीछे नहीं हटे. दिलीप का मानना है कि कोहली की फील्डिंग की खासियत उनकी लगातार मेहनत और खेल को पहले समझने की क्षमता है. आंकड़ों में भी उनकी लंबी फील्डिंग यात्रा दिखाई देती है. गैर-विकेटकीपर के तौर पर उन्होंने भारत के लिए सभी फॉर्मेट में 344 डिसमिसल किए हैं. वनडे में उनके नाम 169 कैच हैं, जो किसी भारतीय फील्डर के सबसे ज्यादा हैं.
दिलीप के मुताबिक, कोहली का प्रभाव उस समय भी दिखता है जब गेंद उनके पास नहीं होती. उन्होंने बताया कि कोहली पावरप्ले से लेकर डेथ ओवर्स तक पूरी ऊर्जा के साथ मैदान पर रहते हैं. कवर और शॉर्ट मिड-विकेट जैसी जगहों पर उनकी तेजी और रिफ्लेक्स टीम के लिए मददगार रहे हैं. दिलीप ने यह भी कहा कि कोहली के साथ फील्डिंग करते समय दूसरे खिलाड़ी भी अपनी क्षमता से ज्यादा देने की कोशिश करते हैं. यानी उनका जोश केवल उनके प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास के खिलाड़ियों के खेल पर भी असर डालता है.
टी. दिलीप भारत की टीम में 'बेस्ट फील्डर मेडल' की शुरुआत से भी जुड़े रहे. 2023 में शुरू किए गए इस अवॉर्ड का मकसद केवल शानदार कैच लेने वाले खिलाड़ी को सम्मान देना नहीं था, बल्कि मैदान पर हर छोटे योगदान को पहचानना था. इससे उन खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिली जो आम तौर पर ऐसे स्थानों पर नहीं रहते जहां गेंद ज्यादा आती है. दिलीप के अनुसार, इस पहल से टीम में सकारात्मक मुकाबला बढ़ा और खिलाड़ी एक-दूसरे के अच्छे प्रयासों का जश्न मनाने लगे. 2023 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान यह मेडल ड्रेसिंग रूम की खास परंपराओं में शामिल हो गया.