Akhilesh Reddy banned for 8 years: अमेरिका के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके भारतीय मूल के खिलाड़ी अखिलेश रेड्डी पर आईसीसी ने बड़ा फैसला लिया है. मैच फिक्सिंग की कोशिश, दूसरे खिलाड़ी को इसमें शामिल करने और जांच के दौरान मोबाइल से सबूत मिटाने के आरोप साबित होने के बाद उन्हें आठ साल के लिए क्रिकेट से बाहर कर दिया गया है.
26 वर्षीय बोडुगुम अखिलेश रेड्डी का पालन-पोषण हैदराबाद में हुआ है. उन्होंने भारत में घरेलू क्रिकेट खेला और विजय हजारे ट्रॉफी की टीम का भी हिस्सा रहे. इसके अलावा वह आईपीएल टीम सनराइजर्स हैदराबाद के साथ नेट बॉलर के रूप में भी जुड़े रहे. बाद में बेहतर मौके की तलाश में वह अमेरिका चले गए और वहां की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में जगह बनाई. दाएं हाथ के बल्लेबाज और ऑफ स्पिन गेंदबाज अखिलेश ने अमेरिका के लिए चार टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. उन्होंने अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू केमैन आइलैंड्स के खिलाफ नॉर्थ अमेरिका टी20 कप में किया था.
यह मामला 2025 में खेली गई अबू धाबी टी10 लीग से जुड़ा है. आईसीसी उस टूर्नामेंट में एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड की ओर से एंटी करप्शन यूनिट की जिम्मेदारी संभाल रहा था. जांच में सामने आया कि अखिलेश रेड्डी ने मैच शुरू होने से कुछ घंटे पहले टीम होटल में एक साथी खिलाड़ी से जानबूझकर गेंदबाजी के दौरान ज्यादा रन देने के लिए कहा था. हालांकि, उस खिलाड़ी ने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया और पूरी जानकारी आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट को दे दी. इसके बाद जांच शुरू हुई, जिसमें रेड्डी के खिलाफ मिले सबूतों के आधार पर उन्हें दोषी माना गया.
आईसीसी की एंटी करप्शन ट्रिब्यूनल ने अखिलेश रेड्डी को तीन अलग-अलग आरोपों में दोषी माना. पहला, मैच के नतीजे को गलत तरीके से प्रभावित करने की कोशिश करना. दूसरा है, दूसरे खिलाड़ी को मैच फिक्सिंग के लिए तैयार करने का प्रयास करना. तीसरा, जांच के दौरान अपने मोबाइल से व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड हटाकर सबूत मिटाने की कोशिश करना. रेड्डी ने अपनी सफाई में कहा कि वह समय-समय पर फोन का डेटा साफ करते रहते हैं लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. इसके बाद आईसीसी ने 21 नवंबर 2025 से प्रभावी आठ साल का प्रतिबंध लगाया, जो 21 नवंबर 2033 तक लागू रहेगा. इस मामले ने एक बार फिर अमेरिका क्रिकेट की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं.