23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स का 23वां संस्करण आयोजित होगा. करीब 12 साल बाद ग्लासगो दूसरी बार इन खेलों की मेजबानी करेगा. इस बार प्रतियोगिता पहले की तुलना में काफी छोटी होगी और केवल 10 खेलों में मुकाबले होंगे. कई लोकप्रिय खेलों को कार्यक्रम से बाहर रखा गया है. ऐसे में भारत के लिए यह संस्करण चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उसके कई पारंपरिक पदक वाले खेल इस बार शामिल नहीं हैं.
इस बार कई लोकप्रिय खेलों को इस प्रतियोगिता से बाहर रखा गया है. इन खेलों में भारत लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहा है. इसलिए इस बदलाव ने भारतीय दल की संभावनाओं को प्रभावित किया है.
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा है. भारत अब तक 564 पदक जीत चुका है. इनमें 203 गोल्ड, 190 सिल्वर और 171 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं. मेडल टेबल में भारत चौथे स्थान पर है. इससे साफ है कि भारत लंबे समय से इन खेलों की प्रमुख ताकतों में शामिल रहा है.
भारत ने सबसे ज्यादा सफलता निशानेबाजी में हासिल की है. इस खेल में देश के खाते में कुल 135 पदक दर्ज हैं. लेकिन इस बार यही खेल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है. इसके अलावा कुश्ती और बैडमिंटन के बाहर होने से भी भारत की संभावित पदक संख्या कम होने की आशंका बढ़ गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 की तुलना में इस बार भारत के कुल पदकों की संख्या कम रह सकती है. हालांकि एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और पैरा स्पोर्ट्स में मजबूत प्रदर्शन भारत को शीर्ष देशों की दौड़ में बनाए रख सकता है. ऐसे में सीमित खेलों के बीच हर मुकाबला भारतीय दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा.
इन खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें
भारतीय उम्मीदें अब एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और मुक्केबाजी पर ज्यादा टिकी रहेंगी. नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन जैसे खिलाड़ी देश के लिए बड़ी उम्मीद बनकर उतरेंगे. इन अनुभवी खिलाड़ियों से स्वर्ण पदक की अपेक्षा की जा रही है और उनकी जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा होगी.