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बार-बार चोटिल हो रहे बुमराह, अब टीम इंडिया को मिलेगा नया 'स्पीड अटैक'? BCCI ने शुरू की तैयारी

जसप्रीत बुमराह की लगातार चोटों को देखते हुए BCCI टेस्ट क्रिकेट के लिए नए तेज गेंदबाजी आक्रमण की तैयारी में जुट गया है. चयनकर्ता ऐसे गेंदबाजों पर नजर रख रहे हैं जो गति और उछाल के दम पर जिम्मेदारी संभाल सकें.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
बार-बार चोटिल हो रहे बुमराह, अब टीम इंडिया को मिलेगा नया 'स्पीड अटैक'? BCCI ने शुरू की तैयारी
Courtesy: ANI

भारतीय टेस्ट टीम में जसप्रीत बुमराह की अहमियत किसी से छिपी नहीं है, उन्हें भारतीय गेंदबाजी की रिढ़ की हड्डी कहा जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी लगातार चोटों ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है. इसी वजह से BCCI अब भविष्य को ध्यान में रखते हुए नए तेज गेंदबाजों का मजबूत समूह तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है. बोर्ड ऐसे खिलाड़ियों पर नजर बनाए हुए है जो तेज गति, अतिरिक्त उछाल और लंबे स्पेल डालने की क्षमता रखते हों. इसके पीछे की बहुत बड़ी वजह यह है कि टीम केवल बुमराह पर ही पूरी तरह से निर्भर न रहे. 

बुमराह की फिटनेस बनी गले की हड्डी 

यॉर्कर किंग जसप्रीत बुमराह पिछले कुछ सालों में कई बार चोटों से जूझ चुके हैं. वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते भी उन्हें कई मुकाबलों से बाहर रहना पड़ा है. BCCI मानता है कि वह अभी भी भारत के सबसे अहम तेज गेंदबाज हैं, लेकिन अब बुमराह की इंजरी  बोर्ड के गले की हड्डी बनती जा रही है. इस कारण फ्यूचर की चुनौतियों को देखते हुए नए विकल्प तैयार करना भी बोर्ड के लिए जरूरी हो गया है.

नए गेंदबाजों पर बोर्ड की नजर

टीम मैनेजमेंट फिलहाल तुषार देशपांडे, गुरजपनीत सिंघा और विदर्भ के नचिकेत भूटे जैसे तेज गेंदबाजों पर नजर बनाए हुए है. माना जा रहा है कि इन खिलाड़ियों में अच्छी गति और पिच से अतिरिक्त उछाल निकालने की क्षमता है. भविष्य के विदेशी दौरों में इन्हें अवसर देकर उनकी क्षमता को परखा जा सकता है.

शमी और सिराज की भूमिका

मोहम्मद सिराज भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के भरोसेमंद सदस्य बने हुए हैं. वहीं मोहम्मद शमी ने चोट से वापसी के बाद घरेलू क्रिकेट में प्रभावशाली प्रदर्शन किया, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली. इससे संकेत मिल रहे हैं कि चयनकर्ता अब भविष्य की योजना को ध्यान में रखकर नए खिलाड़ियों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं.

निर्भरता कम करने की तैयारी

ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत की बुमराह पर निर्भरता साफ दिखाई दी थी. जब वह विकेट नहीं ले सके तो टीम पर दबाव बढ़ गया. इंग्लैंड दौरे में भी उनकी अनुपस्थिति ने तेज गेंदबाजी कॉम्बिनेशन की सीमाओं को उजागर किया. इसी अनुभव के बाद बोर्ड अब ज्यादा संतुलित और मजबूत तेज गेंदबाजी समूह तैयार करना चाहता है.