नई दिल्ली: एशियन्स गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया. गेम्स में अब महिलाओं की भूमिका पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी है. इस बात का सबूत एशियन्स गेम में मिलता है. जापान के आइची-नागोया में हुए इन खेलों में भारत ने 85 मेडल जीते, जिनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज शामिल रहे.
भारत के 21 गोल्ड मेडल में से 11 गोल्ड महिलाओं के नाम रहे, जबकि तीन गोल्ड अलग-अलग कॉम्पेटीशन्स में आए. यानी भारत के गोल्ड मेडल में महिलाओं का योगदान पुरुषों से भी ज्यादा रहा. यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि 2023 में भारतीय महिलाओं ने 9 गोल्ड जीते थे.
बता दें कि इस बार भारत के 495 खिलाड़ी एशियन्स गेम में शामिल हुए थे, जिनमें 234 महिला खिलाड़ी थीं. इनमें कुछ बेहद युवा खिलाड़ी थीं तो कुछ अनुभवी खिलाड़ी लंबे संघर्ष के बाद एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचीं. महिला क्रिकेट टीम ने भारत के लिए गोल्ड जीतकर शुरुआत की. इसके बाद वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल जीता. उनका मेडल खास था क्योंकि भारत को एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग का पिछला मेडल 1998 में मिला था.
एथलेटिक्स में विथ्या रामराज ने 400 मीटर हर्डल्स में ब्रॉन्ज जीता और 54.75 सेकंड के समय के साथ पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया. वहीं, महिला हॉकी टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया. टीम ने गोल्ड जीतकर एशियन गेम्स में 44 साल बाद इस इवेंट में भारत को फिर से टॉप पोजिशन दिलाया.
बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलो वर्ग में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा. वह मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनीं. वहीं, परवीन हुड्डा ने भी शानदार वापसी की. पिछले एशियन गेम्स के बाद मुश्किल दौर से गुजरने के बावजूद उन्होंने इस बार 65 किलो वर्ग में गोल्ड मेडल जीता. शूटिंग में नीरू धांडा ने भी इतिहास बनाया. बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने व्यक्तिगत ट्रैप इवेंट में गोल्ड जीता और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं.
17 साल की कुमकुम मोहोड ने रिकर्व आर्चरी में ओलंपिक चैंपियन को हराकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. वहीं गोल्फ में प्रणवी उर्स ने चीन की वर्ल्ड नंबर-6 खिलाड़ी यिन रुओनिंग को हराकर गोल्ड जीता और एशियन गेम्स में गोल्फ का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. लॉन्ग जंप में एंसी सोजन ने सिल्वर जीता. वहीं 36 साल की सुचिका तारियाल ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में ब्रॉन्ज जीतकर दिखाया कि खेल में उम्र कोई बाधा नहीं है.
एशियन्स गेम्स 2026 ने एक बड़ी बात साफ कर दी है. अगर महिला खिलाड़ियों को लगातार सुविधाएं, ट्रेनिंग और आर्थिक मदद मिले तो भारत की मेडल संख्या और बढ़ सकती है. चीन और अमेरिका जैसे खेलों में मजबूत देशों का उदाहरण भी यही बताता है. इन देशों ने महिला खेलों पर लगातार ध्यान दिया और इसका असर बड़े टूर्नामेंटों की मेडल टैली में दिखाई दिया.
आइची-नागोया में भारतीय महिलाओं का प्रदर्शन सिर्फ मेडल जीतने तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने रिकॉर्ड तोड़े, मुश्किल परिस्थितियों से वापसी की और यह साबित किया कि भारत के खेल भविष्य में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है.