भारत की महिला मुक्केबाज परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 65 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है. फाइनल मुकाबले में परवीन ने चीनी ताइपे की ओलंपिक पदक विजेता चेन निएन-चिन को करीबी मुकाबले में हराया. इस जीत के साथ ही परवीन ने भारत को महिला बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन के बाद दूसरा गोल्ड मेडल दिलाया.
परवीन हुड्डा और चेन निएन-चिन के बीच फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक रहा. पहले राउंड में चेन निएन-चिन के कुछ पंच परवीन को लगे, लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने जल्द ही मुकाबले पर पकड़ बनानी शुरू कर दी. राउंड के आखिरी हिस्से में परवीन ने तेज पंच लगाए और जजों ने 10-9 का स्कोर उनके पक्ष में दिया. इस तरह पहला राउंड परवीन ने 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से अपने नाम किया.
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दूसरे राउंड में चीनी ताइपे की मुक्केबाज ने जोरदार वापसी की. चेन निएन-चिन ने आक्रामक बॉक्सिंग करते हुए इस राउंड में 10-9 से बढ़त हासिल की. इसके बाद मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया और दोनों मुक्केबाजों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली.
अंतिम राउंड में परवीन ने संयम के साथ बॉक्सिंग की और महत्वपूर्ण पंच लगाकर मुकाबले में बढ़त बनाई. जजों ने आखिर में स्प्लिट डिसीजन से परवीन के पक्ष में 3-2 का फैसला सुनाया. इसके साथ ही हरियाणा की इस मुक्केबाज ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीत लिया.
फाइनल से पहले परवीन हुड्डा ने सेमीफाइनल में चीन की ली शू को 5-0 से हराया था. इस जीत के साथ उन्होंने महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जगह बनाई और अपना कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया था.
इससे पहले क्वार्टर फाइनल में भी परवीन ने शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने उज्बेकिस्तान की विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता नवबखोर खामिदोवा को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था. परवीन ने पूरे मुकाबले में आक्रामक अंदाज दिखाया और लगातार सटीक पंच लगाए.
परवीन हुड्डा के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले उन्हें डोपिंग रोधी नियमों से जुड़े मामले में प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था. वाडा के नियमों के तहत ठिकाने की जानकारी देने में विफल रहने के कारण उन पर कार्रवाई हुई थी. इसके बाद एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने रिंग में अपनी वापसी को यादगार बना दिया.
15 अप्रैल 2000 को हरियाणा के रोहतक में जन्मीं परवीन ने कम उम्र से ही बॉक्सिंग में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी. राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद वह भारतीय महिला बॉक्सिंग टीम की महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल हुईं. अब एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है.