भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ दिन दूर सुकून तलाशने वालों के लिए ऊटी किसी जन्नत से कम नहीं है. दक्षिण भारत की नीलगिरि पहाड़ियों में बसा यह हिल स्टेशन पहली नजर में ही लोगों को अपनी ओर खींच लेता है. यहां की ठंडी जलवायु और हरियाली मन को तुरंत सुकून देती है.
ऊटी को ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ भी कहा जाता है और इसकी वजह साफ है. चाय के बागान, घुमावदार सड़कें और बादलों से ढकी पहाड़ियां इसे खास बनाती हैं. यही कारण है कि एक बार यहां आने वाला पर्यटक बार-बार लौटने की चाह रखता है.
ऊटी की सबसे बड़ी खूबी इसकी प्राकृतिक सुंदरता है. चारों तरफ फैले चाय के बागान, ऊंचे-ऊंचे पेड़ और ठंडी हवाएं हर मौसम में सुकून देती हैं. सुबह के वक्त पहाड़ियों पर छाई हल्की धुंध और शाम को ढलता सूरज ऊटी को और भी खूबसूरत बना देता है.
ऊटी में आज भी ब्रिटिश शासन की छाप देखने को मिलती है. पुराने बंगले, चर्च और बोटैनिकल गार्डन इसकी पहचान हैं. नीलगिरि माउंटेन रेलवे से किया गया सफर पर्यटकों के लिए खास अनुभव होता है, जो पहाड़ों के बीच से गुजरते हुए अनोखा नजारा दिखाता है.
ऊटी लेक, डोड्डाबेट्टा पीक और रोज गार्डन यहां के प्रमुख आकर्षण हैं. परिवार हो या कपल, हर किसी के लिए यहां कुछ न कुछ खास है. फोटोग्राफी और नेचर वॉक पसंद करने वालों के लिए ऊटी एक परफेक्ट डेस्टिनेशन माना जाता है.
ऊटी घूमने का खर्च आपके बजट पर निर्भर करता है. आमतौर पर ठहरने, खाने और लोकल घूमने का खर्च रोजाना 2000 से 4000 रुपये प्रति व्यक्ति के बीच रहता है. ट्रेन या बस से पहुंचने पर यात्रा खर्च भी किफायती हो जाता है.
ऊटी घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच माना जाता है. इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और ज्यादातर पर्यटन स्थल खुले रहते हैं, जिससे यात्रा का मजा दोगुना हो जाता है. ऐसे में अगर आप घूमने के लिए प्लान कर रहे हैं तो यहां जा सकते हैं.