menu-icon
India Daily

क्या आपकी भी रात में बार-बार खुलती है नींद? शरीर दे रहा इस बीमारी का संकेत

रात में कभी कभार नींद खुलना सामान्य हो सकता है, लेकिन बार बार नींद टूटना और दोबारा सोने में परेशानी अनिद्रा या स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
क्या आपकी भी रात में बार-बार खुलती है नींद? शरीर दे रहा इस बीमारी का संकेत
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: रात में अचानक नींद खुल जाना आम बात हो सकती है, लेकिन अगर यह समस्या बार बार हो रही है और नींद खुलने के बाद दोबारा सोने में परेशानी होती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बार बार नींद टूटना तनाव, चिंता, अनिद्रा या स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है. इसके कारण अगले दिन थकान, कमजोरी, ध्यान लगाने में परेशानी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है.

रात में नींद खुलने की कई वजह हो सकती हैं. तनाव और चिंता इसकी सबसे आम वजहों में शामिल हैं. दिनभर किसी बात को लेकर परेशान रहने पर दिमाग रात में भी सक्रिय रह सकता है. इससे नींद बार बार टूट सकती है. इसके अलावा कमरे का तापमान, तेज रोशनी, शोर, असहज बिस्तर या गलत तकिया भी नींद में बाधा डाल सकते हैं.

अनिद्रा का संकेत

कुछ मामलों में बार बार नींद खुलना अनिद्रा का संकेत हो सकता है. अनिद्रा में व्यक्ति को सोने में परेशानी होती है, रात में बार बार नींद खुलती है या सुबह सामान्य समय से पहले नींद खुल जाती है. कई बार व्यक्ति पूरी रात पर्याप्त नींद नहीं ले पाता. इसके कारण दिनभर थकान और चिडचिडापन बना रह सकता है.

दूसरी वजह स्लीप एपनिया

रात में नींद टूटने की एक दूसरी वजह स्लीप एपनिया हो सकती है. इसमें सोते समय सांस बार बार रुकने और फिर शुरू होने की समस्या होती है. तेज खर्राटे, नींद में घुटन महसूस होना, अचानक हड़बड़ाकर उठना और सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस करना इसके कुछ संकेत हो सकते हैं. कई लोगों को रात में सांस रुकने की जानकारी खुद नहीं होती और परिवार के सदस्य उनके खर्राटों या सांस रुकने की समस्या को पहचानते हैं.

दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी

अगर रात में नींद बार बार खुलती है तो अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है. दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करने से रात में नींद बेहतर हो सकती है. सोने और जागने का समय भी लगभग तय रखने की कोशिश करनी चाहिए. रात में सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे गैजेट का इस्तेमाल कम करना बेहतर होता है, क्योंकि स्क्रीन और मानसिक उत्तेजना नींद को प्रभावित कर सकती है.

सोने से पहले किताब पढ़ना, धीमा संगीत सुनना या कोई शांत गतिविधि करना मन को आराम देने में मदद कर सकता है. कमरे का वातावरण भी आरामदायक होना चाहिए. सही तकिया और आरामदायक गद्दा शरीर को बेहतर आराम देने में मदद कर सकते हैं.

डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी

हालांकि, केवल रात में कभी कभार नींद खुलना किसी बीमारी का प्रमाण नहीं है. लेकिन अगर लंबे समय तक लगातार नींद टूट रही है, दिन में अत्यधिक नींद आती है, तेज खर्राटे आते हैं, सांस रुकने जैसा महसूस होता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. खासकर स्लीप एपनिया के संदेह में चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण है.