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जानलेवा है Stress! नहीं किया ये काम तो बढ़ जाता है मौत का खतरा

नई दिल्ली: स्ट्रेस या तनाव, आजकल ये शब्द हर किसी की जिंदगी में उसी तरह मौजूद है जैसे हर हाथ में मोबाइल फोन, ऐसा नहीं है कि सिर्फ कूल लगता है इसलिए हर कोई खुद को स्ट्रेस में बता रहा है.

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Edited By: Vineet Kumar
जानलेवा है Stress! नहीं किया ये काम तो बढ़ जाता है मौत का खतरा

नई दिल्ली: स्ट्रेस या तनाव, आजकल ये शब्द हर किसी की जिंदगी में उसी तरह मौजूद है जैसे हर हाथ में मोबाइल फोन. तनाव वैसे तो जीवन का अभिन्न अंग है और जैसे जैसे जीवन में रिस्पांसिबिलिटी आती जाती हैं, वैसे वैसे ये स्ट्रेस  बढ़ता ही जाता है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ कूल लगता है इसलिए हर कोई खुद को स्ट्रेस में बता रहा है.

वर्कप्लेस भी बढ़ाता है जीवन में तनाव

सचमुच आज के इस द्रुतगामी जीवन में हर कोई जल्दी में है, कोई कहीं से निकलने की तो कोई कहीं पहुंचने की. करियर में आगे बढ़ने की होड़ में इंसान भागा जा रहा है और उसके साथ साथ आ रहा है स्ट्रेस. पूंजीवाद के इस दौर में कंपनियां सिर्फ मुनाफा कमाने पर ध्यान देती हैं और इसका भुगतान कर्मचारी अपनी सेहत से करते हैं, क्योंकि जहां आप धीमे पड़े, बात आपकी नौकरी पर आ जाती है.

कार्यक्षेत्र के वातावरण का भी बहुत बड़ा योगदान है इस तनाव को बढ़ाने में. यदि आपकी कंपनी आपके मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखती, तो इसका असर आपकी सेहत पर आज नहीं तो कल दिखना तय है. कार्यक्षमता से ज्यादा काम करने को प्रोत्साहन देना और कर्मचारी पर अधिक से अधिक काम करने का प्रेशर लोगों को ब्लड प्रेशर दे रहा है.

कम नींद लेने से भी बढ़ता है तनाव

कम नींद भी लोगों में एक अदृश्य तनाव को पैदा करती है जो कि ऊपरी तौर पर दिखाई नहीं देता पर हर समय थकान और जल्दी जल्दी बीमार पढ़ना इसके लक्षण हो सकते हैं. हाल ही में हुए एक शोध में पाया गया कि 30 से 45 वर्ष की आयु के लोगों की नींद पूरी नहीं होती क्योंकि काम के घंटे इतने ज्यादा हैं कि वे लोग व्यक्तिगत समय के लिए अपनी नींद कुर्बान कर रहे हैं और 4-5 घंटे सो कर काम पर जा रहे हैं.

तनाव के चलते बढ़ जाता है कॉर्टिसोल लेवल

कोविड के बाद से ही 35-40 की उम्र के लोगों में हार्ट अटैक, और दूसरी दिल की बीमारियों की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं. सिर्फ खराब खान पान ही नहीं बल्कि लंबे समय तक कार्यक्षेत्र में उपजे तनाव के कारण भी ये गंभीर बीमारियां सामने आ रही हैं.
हाल में हुए एक शोध में पाया गया कि इन लोगों के कॉर्टिसोल लेवल भी काफी ऊपर थे.  दरअसल, कॉर्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है जो तनाव के वक्त शरीर में बढ़ जाता है. थोड़े समय के लिए ये उपयोगी है पर अगर लगातार इसकी मात्रा खून में बढ़ी रहे तो ये बाकी अंगों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है.

सोचने-समझने की शक्ति छीन लेता है तनाव

जामा (Journal of American Medical Association) में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि लंबे समय तक तनाव से cognitive function यानी देखने समझने इत्यादि की शक्ति आदमी में कम होती जाती है. यहां तक कि डायबिटीज और अन्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के लिए भी क्रोनिक यानी लंबे समय तक रहने वाले स्ट्रेस को दोषी माना गया है.

कुल मिलाकर, तनाव अपने आप में सभी बड़ी छोटी बीमारियों का कारक है, इसलिए इसे अपनी जिंदगी में कंट्रोल करना बहुत ही जरूरी है.  वर्क लाइफ बैलेंस मात्र एक ट्रेंडिंग शब्द नहीं बल्कि अच्छे  स्वास्थ्य की चाभी भी है.

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