नई दिल्ली: गर्मी के मौसम में फ्रिज का ठंडा पानी कई लोगों को गले में खराश या सर्दी-जुकाम दे देता है, इसलिए घरों में मिट्टी का मटका फिर से लोकप्रिय हो गया है. यह पानी न सिर्फ प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है, बल्कि मिट्टी के क्षारीय गुण शरीर के पीएच बैलेंस को भी सुधारते हैं. लेकिन मटके की मिठास और फायदे तभी मिलते हैं जब इसकी सफाई और रखरखाव सही तरीके से हो.
थोड़ी सी लापरवाही बैक्टीरिया, कीटाणु या मोल्ड बढ़ा सकती है, जिससे पेट दर्द, उल्टी या संक्रमण का खतरा रहता है. आइए जानें उन पांच गलतियों के बारे में जो आपको नहीं करनी चाहिए.
मटके को हर 2-3 दिन में खाली करके सिर्फ साफ पानी से अच्छी तरह रगड़कर धोएं. साबुन, डिटर्जेंट या कोई केमिकल बिल्कुल न लगाएं, क्योंकि मिट्टी के छिद्र इनके अवशेष सोख लेते हैं. ये रसायन पानी में मिलकर सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके बजाय गर्म पानी या नींबू का इस्तेमाल करके प्राकृतिक सफाई करें.
पानी निकालने के लिए हाथ या गिलास मटके में न डालें, इससे बैक्टीरिया और गंदगी फैलने का खतरा बढ़ जाता है. हमेशा लंबे हैंडल वाला डोंगा या नल वाला मटका इस्तेमाल करें. यह तरीका संक्रमण से बचाता है और पानी शुद्ध रहता है.
मटके को सीधी धूप में न रखें, क्योंकि इससे पानी गर्म हो जाता है और मिट्टी के प्राकृतिक गुण कमजोर पड़ सकते हैं. इसे घर के ठंडे, छायादार कोने में रखें. गीली बोरी या कपड़े से लपेटने पर वाष्पीकरण बढ़ता है, जिससे पानी ज्यादा ठंडा और स्वादिष्ट रहता है.
मिट्टी के मटके की भी एक उम्र होती है. समय के साथ उसके छिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे ठंडक कम मिलती है और बैक्टीरिया जमा होने लगते हैं. बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर साल या दो साल में नया मटका लेना चाहिए. पुराने में मोल्ड या गंदगी आसानी से छिप जाती है.
मटके को हमेशा अच्छी तरह फिट होने वाले ढक्कन, प्लेट या साफ कपड़े से ढकें. इससे धूल, मिट्टी, मच्छर या कीड़े पानी में नहीं गिरते. ढक्कन की सफाई भी नियमित करें, क्योंकि गंदा ढक्कन पूरे पानी को दूषित कर सकता है.
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