नई दिल्ली: न्यूरोसाइंस के अनुसार लड़कों और लड़कियों के दिमाग में बनावट और काम करने के तरीके के लिहाज से कई अंतर होते हैं. ये अंतर उनके सोचने, व्यवहार करने और सीखने के तरीकों पर असर डालते हैं. लड़कों और लड़कियों के दिमाग में बनावट और काम करने के तरीके के लिहाज से कई अंतर होते हैं. ये अंतर उनके सोचने, व्यवहार करने और सीखने के तरीकों पर असर डालते हैं.
पुरुषों के दिमाग में 'व्हाइट मैटर' का अनुपात ज़्यादा होता है. यह दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच तालमेल बिठाने में मदद करता है. दूसरी ओर, महिलाओं के दिमाग में 'ग्रे मैटर' ज्यादा होता है, जो जानकारी को समझने और उस पर काम करने की क्षमता को बढ़ाता है.
'हिप्पोकैम्पस' याददाश्त के लिए जिम्मेदार होता है. यह अक्सर महिलाओं में ज्यादा सक्रिय रहता है, जिससे उनकी चीजों को याद रखने की क्षमता ज्यादा मजबूत होती है.
आमतौर पर लड़कों के दिमाग के एक ही हिस्से के अंदर के आपसी जुड़ाव ज्यादा मजबूत होते हैं. ये जुड़ाव ध्यान लगाने और शारीरिक कौशल को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. इसके विपरीत लड़कियों के दिमाग के दोनों हिस्सों के बीच का जुड़ाव ज्यादा मजबूत होता है. यह एक साथ कई काम करने और भावनात्मक समझ को बेहतर बनाता है, साथ ही तर्क और सहज ज्ञान के बीच तालमेल बिठाने में भी मदद करता है.
महिलाएं आमतौर पर बोलकर अपनी बात कहने में ज्यादा माहिर होती हैं क्योंकि भाषा से जुड़े उनके दिमाग के केंद्र दोनों हिस्सों में सक्रिय रहते हैं. वहीं पुरुष अक्सर जगह की समझ रास्ता खोजने और समस्याओं को सुलझाने में ज्यादा माहिर होते हैं. इस अंतर की वजह दिमाग के उन खास हिस्सों में मौजूद अंतर को माना जाता है, जो इन क्षमताओं से जुड़े होते हैं.
एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन दिमाग के काम करने के तरीके और व्यवहार पर असर डालते हैं. महिलाओं में चिंता और अवसाद होने की संभावना ज्यादा होती है, जबकि पुरुषों में ADHD और व्यवहार से जुड़े विकार यानी behavioral disorders होने की संभावना ज्यादा होती है.