नई दिल्ली: जनवरी के मौसम में बगीचों और खेतों में नींबू के पेड़ पर फूलों की बहार दिखने लगती है. यही वह समय होता है, जब पौधे को अतिरिक्त और संतुलित पोषण की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि फूल आने के बाद अगर मिट्टी में ऑर्गेनिक पोषण सही तरीके से दिया जाए, तो पौधे की ऊर्जा फल निर्माण में लगती है, जिससे उत्पादन बेहतर मिलता है.
अक्सर किसान और गार्डनिंग प्रेमी फूलों के बाद सामान्य पानी और खाद पर निर्भर रहते हैं, लेकिन यही वह चरण है, जब थोड़ी सी सही देखभाल पूरी फसल की तस्वीर बदल सकती है. ऑर्गेनिक चीज़ें पौधे की जड़ों को मजबूत बनाती हैं, मिट्टी में माइक्रो पोषक तत्व बढ़ाती हैं और पेड़ को लंबे समय तक प्राकृतिक ऊर्जा देती हैं. इससे फल झड़ने की समस्या भी कम होती है.
फूल आने के बाद सरसों खली सबसे असरदार ऑर्गेनिक पोषण में से एक मानी जाती है. यह मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सल्फर की कमी पूरी करती है. 250 ग्राम सरसों खली को 5 लीटर पानी में 48 घंटे भिगोकर छान लें. महीने में एक बार यह घोल पौधे की जड़ों में डालने से नींबू की साइज बड़ी और छिलका चमकदार बनता है.
केले में पोटैशियम भरपूर होता है, जो फूल के बाद फल विकास के लिए जरूरी है. 3–4 पके केले को 4 लीटर पानी में मसलकर 24 घंटे रखें. इसे छानकर 15–20 दिन में एक बार पौधे में डालें. पोटैशियम से फल की कोशिकाएं तेजी से विकसित होती हैं, जिससे नींबू रसदार और बड़े आकार में उगते हैं. यह घोल पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.
फूल के बाद 1–2 किलो अच्छी तरह सड़ी गोबर खाद को पौधे के तने से 1 फुट दूर गोलाई में मिट्टी में मिलाएं. गोबर खाद मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, नमी संतुलन सुधारती है और लाभकारी सूक्ष्म जीव सक्रिय करती है. इससे फल झड़ने की समस्या कम होती है और नींबू गुच्छों में ज्यादा संख्या में लगते हैं. 45 दिन के अंतर पर दोहराएं.
मछली अमीनो एसिड (FAA) एक नेचुरल ग्रोथ बूस्टर है, जो फूल के बाद नींबू की ग्रोथ तेज करता है. 10 मिली FAA को 1 लीटर पानी में मिलाकर 20–25 दिन में एक बार स्प्रे करें या मिट्टी में डालें. इससे फल का वजन बढ़ता है, रस की मात्रा बेहतर होती है और पेड़ लंबे समय तक स्वस्थ रहता है.
अधिकतम परिणाम के लिए 15 दिन के अंतर पर पोषण बदलकर दें: पहले FAA स्प्रे, फिर केले का घोल, फिर सरसों खली घोल. यह चक्र 45–60 दिन तक अपनाने से नींबू बड़े क्लस्टर में उगते हैं. ध्यान रखें कि अधिक खाद तने से दूर दें, ताकि जड़ें बिना जलन पोषण ग्रहण कर सकें. सुबह या शाम का समय बेहतर माना जाता है.
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