नई दिल्ली: रसोई में इस्तेमाल होने वाला चाकू रोजमर्रा की सबसे जरूरी चीजों में से एक है. कई लोग कुछ रुपये बचाने के लिए सस्ता चाकू खरीद लेते हैं, लेकिन यही छोटी सी बचत आगे चलकर सेहत और सुरक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि खराब गुणवत्ता वाले चाकू जल्दी खराब होते हैं, जंग पकड़ लेते हैं और हादसों का खतरा भी बढ़ा देते हैं.
घर बदलने या नई रसोई का सामान खरीदते समय लोग अक्सर कीमत देखकर फैसला लेते हैं. ऐसे में 10 या 20 रुपये सस्ता चाकू आकर्षक लग सकता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता पर ध्यान न देने से बाद में परेशानी हो सकती है. रसोई में लगभग हर दिन चाकू का इस्तेमाल होता है, इसलिए मजबूत और अच्छी गुणवत्ता वाला चाकू चुनना जरूरी है.
विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी गुणवत्ता के चाकू स्टेनलेस स्टील जैसी मजबूत धातु से बनाए जाते हैं. ऐसे चाकू लंबे समय तक चलते हैं और उनकी धार भी जल्दी खराब नहीं होती. वहीं सस्ते चाकू अक्सर कमजोर या घटिया धातु से बने होते हैं, जिनमें कुछ समय बाद जंग लगने या रंग बदलने की समस्या शुरू हो सकती है.
यदि जंग लगा चाकू लगातार सब्जियां, फल या अन्य खाद्य पदार्थ काटने में इस्तेमाल किया जाए तो उसकी जंग की परत खाने के संपर्क में आ सकती है. इसलिए लंबे समय तक ऐसे चाकू का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता. इसी कारण विशेषज्ञ भरोसेमंद और अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद खरीदने की सलाह देते हैं.
सस्ते चाकू की दूसरी बड़ी समस्या उसकी धार होती है. ऐसे चाकू कुछ ही दिनों में कुंद हो जाते हैं, जिससे सब्जियां काटने के लिए अधिक जोर लगाना पड़ता है. ज्यादा दबाव लगाने पर चाकू फिसल सकता है और हाथ कटने का खतरा बढ़ जाता है.
इसके अलावा कम गुणवत्ता वाले चाकुओं का हैंडल भी अक्सर कमजोर प्लास्टिक का बना होता है. यदि हैंडल की पकड़ अच्छी न हो तो इस्तेमाल के दौरान चाकू हाथ से फिसल सकता है, जिससे गंभीर चोट लग सकती है. इसलिए खरीदारी करते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि चाकू की धातु, धार, हैंडल की मजबूती और ब्रांड की विश्वसनीयता पर भी ध्यान देना चाहिए.
अच्छी गुणवत्ता वाला चाकू शुरुआत में थोड़ा महंगा जरूर लग सकता है, लेकिन यह लंबे समय तक चलता है, सुरक्षित रहता है और रसोई के काम को आसान बनाता है. ऐसे में कुछ रुपये बचाने के बजाय टिकाऊ और सुरक्षित चाकू खरीदना बेहतर विकल्प माना जाता है.