हमारी धरती को पानी का ग्रह कहा जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि इसमें से बहुत कम पानी ही इंसानों के इस्तेमाल के लायक है. वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, धरती पर मौजूद कुल पानी का लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा खारा है, जो समुद्रों और महासागरों में पाया जाता है. बाकी बचा हुआ करीब 3 प्रतिशत पानी ही मीठा यानी पीने योग्य होता है. यही पानी नदियों, झीलों, ग्लेशियर और जमीन के नीचे मौजूद जल स्रोतों में मिलता है.
जब बात दुनिया में सबसे ज्यादा फ्रेश वाटर की होती है, तो कनाडा का नाम सबसे ऊपर आता है. संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं के अनुसार, कनाडा के पास दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय मीठे पानी का भंडार है. कहा जाता है कि दुनिया के कुल ताजे पानी का लगभग पांचवां हिस्सा अकेले कनाडा में मौजूद है. यही वजह है कि यह देश जल संसाधनों के मामले में सबसे समृद्ध माना जाता है.
कनाडा के पास इतने ज्यादा पानी की सबसे बड़ी वजह उसकी भौगोलिक स्थिति है. यहां पूरे देश में लगभग 20 लाख से ज्यादा झीलें मौजूद हैं. इनमें से कई झीलें हजारों साल पहले ग्लेशियर पिघलने से बनी थीं. ये झीलें आज भी पानी का बड़ा स्रोत हैं और लगातार ताजे पानी की आपूर्ति करती हैं.
कनाडा और अमेरिका की सीमा पर स्थित ग्रेट लेक्स दुनिया के सबसे बड़े मीठे पानी के स्रोतों में गिनी जाती हैं. इनमें सुपीरियर, मिशिगन, ह्यूरन, एरी और ओंटारियो झील शामिल हैं. इन झीलों में अकेले दुनिया के कुल सतही मीठे पानी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है. यानी ये झीलें दुनिया की बड़ी आबादी की प्यास बुझाने की क्षमता रखती हैं.
दुनिया के कई दूसरे देशों के पास भी मीठे पानी के अच्छे स्रोत हैं, लेकिन वे कनाडा के मुकाबले काफी कम हैं. उदाहरण के लिए ब्राजील के पास अमेजन बेसिन है, जो दुनिया की सबसे बड़ी नदी प्रणाली में से एक है. इसके बावजूद, कुल मीठे पानी के भंडार में कनाडा सबसे आगे बना हुआ है.
भारत के पास भी मीठे पानी के कई महत्वपूर्ण स्रोत मौजूद हैं. हिमालयी क्षेत्र में फैले ग्लेशियर देश के लिए पानी का बड़ा स्रोत हैं. इसके अलावा देश में हजारों झीलें और नदियां हैं, जो करोड़ों लोगों की जरूरतें पूरी करती हैं. उत्तर पूर्वी भारत में भी साफ और प्राकृतिक जल स्रोत बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं.