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Inspiring Journey: 17 की उम्र में शादी, ससुराल में अंडर गारमेंट में छुपाकर खाई रोटी, दो बच्चों के साथ पढ़ाई कर ऐसे बनीं अफसर

सविता प्रधान का बचपन आर्थिक अभाव में बीता और वह अपने गांव की 10वीं पास करने वाली पहली लड़की बनीं. कम उम्र में शादी के बाद उन्होंने ससुराल में कथित घरेलू हिंसा और प्रताड़ना झेली.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
Inspiring Journey: 17 की उम्र में शादी, ससुराल में अंडर गारमेंट में छुपाकर खाई रोटी, दो बच्चों के साथ पढ़ाई कर ऐसे बनीं अफसर
Courtesy: savitapradham Instagram Account

कभी खाने के लिए तरसने वाली एक आदिवासी लड़की ने अपनी जिंदगी की मुश्किल परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी. 16-17 साल की उम्र में शादी, ससुराल में कथित उत्पीड़न और घरेलू हिंसा, दो बच्चों की जिम्मेदारी और आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. 

ब्यूटी पार्लर में काम किया, एमए किया और कॉलेज में टॉप किया. इसके बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी की और पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर अफसर बन गईं. यह कहानी है मध्य प्रदेश की अधिकारी सविता प्रधान की.

सविता प्रधान का बचपन

सविता प्रधान का बचपन बेहद साधारण और आर्थिक अभावों में बीता. वह एक आदिवासी परिवार से आती हैं. उनके गांव में सुविधाओं का अभाव था और परिवार कृषि कार्य से जुड़ा था. सविता भी घर के काम और खेती में परिवार का हाथ बंटाती थीं. उन्हें आदिवासी छात्रा होने के कारण स्कॉलरशिप भी मिलती थी. वह अपने गांव की पहली लड़की थीं, जिसने 10वीं की परीक्षा पास की.

सविता का सपना

10वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ा. सविता का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन इसी दौरान उनके लिए शादी का रिश्ता आ गया. परिवार ने बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए शादी के लिए हामी भर दी. सगाई के करीब एक साल बाद उनकी शादी हो गई. उस समय उनकी उम्र महज 16-17 साल थी.

सविता ने एक इंटरव्यू में बताया 

सविता ने एक इंटरव्यू में अपने वैवाहिक जीवन के मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया था कि शादी के बाद उन्हें ससुराल में कई तरह की पाबंदियों और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. उन्होंने दावा किया था कि उन्हें भरपेट खाना तक नहीं मिलता था और वह कई बार रोटी छिपाकर बाथरूम में जाकर खाती थीं. उनके मुताबिक, ससुराल में उनके साथ मारपीट भी होती थी.

हालात इतने खराब हो गए कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से टूटने लगीं. बीमारी के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और इसके बाद वह मायके लौट आईं. इस दौरान वह दो बच्चों की मां बन चुकी थीं. मायके लौटने के बाद उनकी मां ने उनका साथ दिया और सविता ने अपनी जिंदगी को दोबारा खड़ा करने का फैसला किया.

बच्चों की जिम्मेदारी

उन्होंने बच्चों की जिम्मेदारी संभालने के साथ पढ़ाई जारी रखी. आर्थिक जरूरतों के लिए ब्यूटी पार्लर में काम किया. इसी दौरान उन्होंने एमए की पढ़ाई पूरी की और कॉलेज में टॉप किया. इसके बाद उन्हें सिविल सर्विसेज के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने एमपीपीएससी की परीक्षा का फॉर्म भरा और अपनी तैयारी शुरू कर दी.

सविता ने पहले ही प्रयास में परीक्षा के इंटरव्यू चरण तक जगह बनाई. उन्हें करीब 75 हजार रुपये की स्कॉलरशिप भी मिली. इसके बाद उन्होंने मेहनत जारी रखी और पहले ही प्रयास में अफसर बनने में सफलता हासिल की. उनकी पहली पोस्टिंग नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव नगर पालिका में हुई.

सविता के निजी जीवन की मुश्किलें

अफसर बनने के बाद भी सविता के निजी जीवन की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुईं. उनके मुताबिक, पति की प्रताड़ना जारी रही. उन्होंने पति की मदद करने और परिवार को संभालने की कोशिश भी की, लेकिन हालात नहीं बदले. आखिरकार उन्होंने पति के खिलाफ केस दर्ज कराया और बाद में दोनों का तलाक हो गया.

सविता प्रधान ने साल 2017 में दूसरी शादी की. आज वह अपने परिवार के साथ जिंदगी आगे बढ़ा रही हैं. उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि बेहद कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत के सहारे इंसान अपनी जिंदगी की दिशा बदल सकता है.