Inspiring Journey: जिंदगी में कुछ सपने सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन अपनों के लिए भी होते हैं, जिनकी याद इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देती है. नेहा पांचाल के लिए अफसर बनने का सपना भी ऐसा ही था. दिल्ली के एक सामान्य परिवार से आने वाली नेहा ने कम उम्र में अपने भाई को खो दिया. परिवार पर इलाज के लिए भारी कर्ज चढ़ गया. इन मुश्किलों के बीच शादी हुई, बेटी की जिम्मेदारी आई, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से मुंह नहीं मोड़ा.
नेहा का सफर आसान नहीं रहा. घर परिवार संभालते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना और बार बार असफलता का सामना करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी. कई बार चयन बेहद करीब आकर छूट गया. इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. आखिरकार UPPSC 2024 में पहली रैंक हासिल कर उन्होंने अपने लंबे संघर्ष को सफलता में बदल दिया. उनकी कहानी उन लोगों को हिम्मत देती है, जो मुश्किल हालात में अपने सपनों को छोड़ने के बारे में सोचने लगते हैं.
नेहा की जिंदगी में साल 2013 एक बड़ा मोड़ लेकर आया, जब उनके 17 वर्षीय भाई विनीत को ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला. इलाज के दौरान परिवार पर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज हो गया. भाई को खोने का दुख और आर्थिक संकट उनके परिवार के लिए बेहद कठिन दौर था. भाई की अफसर बनने की इच्छा ने नेहा को इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.
भाई की मौत के करीब तीन महीने बाद, अप्रैल 2015 में नेहा की शादी हो गई. नए परिवार में अपनी जगह बनाने और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के बीच पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था. साल 2016 में बेटी के जन्म के बाद जिम्मेदारियां और बढ़ गईं. फिर भी अफसर बनने का उनका सपना जिंदा रहा. साल 2018 में उन्होंने UPSC की तैयारी दोबारा शुरू करने का फैसला किया.
नेहा को शुरुआती तीन प्रयासों में UPSC प्रीलिम्स में सफलता नहीं मिली. साल 2021 में वह महज दो अंकों से चयन से चूक गईं. इसके बाद UPPSC की परीक्षाओं में 2022 और 2023 के दौरान भी उन्हें असफलताओं का सामना करना पड़ा. लगातार नौ बार नाकामी मिलने के बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी. इस कठिन समय में उनके पति और मां ने उनका हौसला बनाए रखा.
नेहा की मेहनत आखिरकार रंग लाई और उन्होंने UPPSC 2024 में पहली रैंक हासिल की. बताया जाता है कि रात करीब 1:30 बजे उनके पति ने उन्हें रैंक 1 आने की खबर दी. यह पल वर्षों की मेहनत और इंतजार का नतीजा था. डिप्टी कलेक्टर बनकर नेहा ने अपने लक्ष्य को हासिल किया. उनकी कहानी बताती है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और असफलताओं के बावजूद निरंतर प्रयास इंसान को मंजिल तक पहुंचा सकते हैं.