Inspiring Journey: सफलता रातों रात नहीं मिलती. यह सालों की मेहनत, धैर्य और हारकर फिर उठ खड़े होने की जिद से बनती है. MPPSC में रैंक 1 लाने वाली दीपिका पाटीदार की कहानी यही सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सुधार का मौका होती है.
मध्य प्रदेश के देवास जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर डिप्टी कलेक्टर बनने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा. कई बार असफलता मिली, लेकिन हार मानना उन्हें मंजूर नहीं था. आज उनकी कहानी हजारों अभ्यर्थियों के लिए मिसाल बन गई है.
दीपिका ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की. इसके बाद 11वीं और 12वीं की शिक्षा राऊ के बोर्डिंग स्कूल से पूरी की. उन्होंने ऊंची उड़ान का सपना देखा और अपने परिवार को गर्व का मौका देना चाहती थीं.
इंदौर के होलकर साइंस कॉलेज से उन्होंने BSc कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया. इसी दौरान MPPSC की तैयारी का फैसला लिया. विषयों की बेहतर समझ के लिए इतिहास में MA भी किया. उनका सिविल सेवा का सफर 2016 में शुरू हुआ था.
2017 में पहले प्रयास में वह प्रीलिम्स भी पास नहीं कर सकीं. इसके बाद 2018 से लगातार चार साल इंटरव्यू तक पहुंचीं, पर फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया. कई बार वह निराश हुईं, लेकिन जीतने की जिद ने उन्हें एक और प्रयास के लिए तैयार किया.
असफलताओं का विश्लेषण करने पर दीपिका को समझ आया कि कमी मेन्स की सही रणनीति और मॉक इंटरव्यू में थी. उन्होंने आंसर राइटिंग और पर्सनल डेवलपमेंट पर ज्यादा ध्यान दिया. इससे आत्मविश्वास लौटा और उन्होंने MPPSC 2022 की परीक्षा में रैंक 1 हासिल की. वह मानती हैं कि सेल्फ मोटिवेशन सबसे बड़ी कुंजी है और माता पिता का अटूट समर्थन उनकी सफलता का आधार रहा.