Inspiring Journey Vipul Kumar Pandey: जिंदगी में कई बार किसी की कही हुई बात इंसान को अंदर तक तोड़ देती है, लेकिन कभी-कभी वही बात आगे बढ़ने की सबसे बड़ी वजह भी बन जाती है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले विपुल कुमार पांडेय के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के कारण उनकी योग्यता पर सवाल उठाया गया. उन्हें ताना दिया गया कि वह न तो IAS हैं और न ही PCS अधिकारी. यह बात उनके दिल में उतर गई और उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाने का फैसला किया.
विपुल कुमार पांडेय उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई के बाद डिप्लोमा किया और फिर बरेली की रोहिलखंड यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री हासिल की. उनके पिता सिंचाई विभाग में सर्वेयर के पद पर कार्यरत थे. पढ़ाई के बाद विपुल ने कोचिंग में पढ़ाना शुरू किया. इसी दौरान उनकी रुचि सिविल सेवा में बढ़ने लगी और उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखना शुरू किया.
विपुल के मुताबिक, डिप्लोमा के दिनों में कोचिंग पढ़ाते समय एक अभिभावक ने उनकी योग्यता पर सवाल उठाया था. उनसे कहा गया कि हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले होकर वह दूसरों को क्या पढ़ाएंगे और वह IAS-PCS अधिकारी भी नहीं हैं. यह टिप्पणी उनके लिए बेहद चुभने वाली थी. उन्होंने इस अपमान को अपनी कमजोरी मानने के बजाय चुनौती के रूप में लिया और अधिकारी बनकर अपनी क्षमता साबित करने का फैसला किया.
वर्ष 2018 में विपुल ने UPSC और UPPSC समेत हरियाणा तथा उत्तराखंड की राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान देना शुरू किया. लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें कई बार प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं में असफलता मिली. उत्तराखंड पीसीएस की एक परीक्षा में वह महज 0.01 अंक से चूक गए. इतनी करीबी हार के बाद भी उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे.
संघर्ष के दौरान विपुल ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया. एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर रातें गुजारनी पड़ीं. परीक्षा में असफल होने के बाद निराशा में उन्होंने अपना प्रश्नपत्र फाड़ दिया था. बुखार होने के बावजूद पढ़ाई जारी रखने जैसी मुश्किलें भी उनके सामने आईं. इस दौर में उनके भाई ने उनका हौसला बढ़ाया और बड़े लक्ष्य के साथ छोटे पड़ावों पर ध्यान देने की सलाह दी.
लंबे संघर्ष के बाद विपुल ने UPPSC 2024 की परीक्षा में सफलता हासिल की. अंतिम चयन सूची में उन्हें असिस्टेंट कमिश्नर का पद मिला. यह उपलब्धि उनके लिए केवल नौकरी पाने की खुशी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और धैर्य का परिणाम थी. उनकी कहानी बताती है कि बार-बार असफल होना मंजिल का अंत नहीं है. सही दिशा में लगातार प्रयास करने वाले युवाओं के लिए विपुल का सफर उम्मीद और हिम्मत की मिसाल बन सकता है.