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Inspiring Journey: पान की दुकान चलाते थे पिता, बेटी ने जज बनकर बढ़ाया मान; तानों के बीच ऐसे रचा इतिहास

कानपुर की निशी गुप्ता ने साबित कर दिया कि सपने पूरे करने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा मजबूत इरादों की जरूरत होती है.

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Edited By: Reepu Kumari
Inspiring Journey: पान की दुकान चलाते थे पिता, बेटी ने जज बनकर बढ़ाया मान; तानों के बीच ऐसे रचा इतिहास
Courtesy: instagram.com/nishii_gupta._/ and Grok

Inspiring Journey: कानपुर की निशी गुप्ता की कहानी उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के बीच अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं. एक साधारण परिवार में जन्मी निशी ने यूपी पीसीएस-जे 2022 परीक्षा में पहली रैंक हासिल कर पूरे प्रदेश में अपनी पहचान बनाई. उनके पिता पान की दुकान चलाते हैं, लेकिन बेटी को पढ़ाने के लिए उन्होंने समाज के तानों की परवाह नहीं की. आज निशी की सफलता उनके परिवार के संघर्ष और विश्वास की मिसाल है.

पिता चलाते थे पान की दुकान

निशी गुप्ता कानपुर के एक साधारण संयुक्त परिवार से आती हैं. उनके पिता पान की दुकान चलाते हैं. आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि स्कूल की फीस और किताबों का इंतजाम करना भी कई बार मुश्किल हो जाता था. इसके बावजूद निशी ने पढ़ाई जारी रखी और कानपुर से ही अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. परिवार की सीमित आय उनके सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकी.

हिंदी माध्यम से पढ़ाई, फिर चुना कानून का रास्ता

निशी बचपन से पढ़ाई में अच्छी थीं. उन्होंने हिंदी माध्यम के स्कूल से शिक्षा हासिल की थी. 12वीं के बाद उन्होंने कानून के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया. अंग्रेजी और कानूनी शब्दावली को समझना उनके लिए चुनौती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई पूरी कर वह अपने परिवार की पहली सदस्य बनीं, जिन्होंने कानूनी क्षेत्र में कदम रखा.

बेटी को पढ़ाने पर पिता को सुनने पड़े ताने

निशी के परिवार में बड़ी बेटी की शादी महज 23 साल की उम्र में हो गई थी. ऐसे माहौल में छोटी बेटी को आगे पढ़ाने का फैसला आसान नहीं था. समाज और रिश्तेदारों के दबाव के बावजूद उनके पिता ने निशी की पढ़ाई नहीं रुकने दी. उन्होंने लोगों की बातों को नजरअंदाज किया और बेटी को अपने लक्ष्य तक पहुंचने का मौका दिया.

बड़ी बहन की किताबों से की न्यायिक सेवा की तैयारी

आर्थिक तंगी के कारण निशी के लिए नई किताबें खरीदना मुश्किल था. ऐसे में उन्होंने बड़ी बहन की किताबों से पढ़ाई की. तैयारी के दौरान एक स्टडी पार्टनर ने भी उनका साथ दिया. निशी के मुताबिक, न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता के लिए रिपीटेशन, रिटेंशन और रीप्रोडक्शन यानी बार-बार दोहराना, याद रखना और परीक्षा में सही तरीके से लिखना बेहद जरूरी है. उन्होंने अंग्रेजी सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया.

असफलताओं के बाद UP PCS-J में हासिल की पहली रैंक

निशी ने मध्य प्रदेश और राजस्थान की न्यायिक सेवा परीक्षाएं भी दी थीं. वह इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन एक-एक नंबर के अंतर से चयन नहीं हो पाया. इसके बावजूद उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और तैयारी जारी रखी. यूपी पीसीएस-जे 2022 परीक्षा में पहली रैंक हासिल कर उन्होंने अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, निशी गुप्ता वर्तमान में महोबा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) और न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत हैं.