menu-icon
India Daily

अमेरिका का शेयर बाजार धड़ाम, फिर भी भारत में 5 दिन में 4000 अंकों की तेजी! जानिए आखिर क्यों दौड़ा सेंसेक्स?

भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ दिनों में निवेशकों को चौंका दिया है. जहां अमेरिकी शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, वहीं भारतीय बाजार में जबरदस्त रिकवरी दर्ज की गई है. पिछले 5 कारोबारी दिनों में सेंसेक्स करीब 4,000 अंक चढ़ चुका है.

Shilpa Shrivastava
अमेरिका का शेयर बाजार धड़ाम, फिर भी भारत में 5 दिन में 4000 अंकों की तेजी! जानिए आखिर क्यों दौड़ा सेंसेक्स?
Courtesy: ChatGPT

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ दिनों में निवेशकों को चौंका दिया है. जहां अमेरिकी शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, वहीं भारतीय बाजार में जबरदस्त रिकवरी दर्ज की गई है. पिछले 5 कारोबारी दिनों में सेंसेक्स करीब 4,000 अंक चढ़ चुका है. इस दौरान इसमें 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है. दूसरी तरफ अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों के प्रमुख इंडेक्स नैस्डैक में पिछले 5 दिनों में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई है. एक महीने में इसकी गिरावट लगभग 10 फीसदी तक पहुंच गई है.

आमतौर पर जब अमेरिकी बाजार में गिरावट आती है, तो उसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण भारतीय बाजार पहले ही अपने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुका है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अमेरिकी बाजार में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में इतनी तेजी क्यों आ रही है? इसके पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कंपनियों के बेहतर नतीजे, मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और LTCG टैक्स में संभावित राहत जैसे कई कारण हैं.

1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली राहत:

भारतीय शेयर बाजार को मजबूती मिलने का एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से कच्चे तेल के रूप में खरीदता है. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत का आयात बिल बढ़ जाता है.

इससे सरकार और कंपनियों दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन और उत्पादन की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है. तेल की कीमतें कम रहने से कंपनियों की लागत घट सकती है और मुनाफे में सुधार हो सकता है.

2. GST कलेक्शन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था को मजबूती:

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का एक बड़ा संकेत GST कलेक्शन में बढ़ोतरी भी है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में देश का कुल GST कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 22.9 फीसदी बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल से अक्टूबर तक कुल जीएसटी कलेक्शन 14.78 लाख करोड़ रुपये रहा. यह पिछले साल की समान अवधि से 13.2 फीसदी ज्यादा है. सरकार की बढ़ती कमाई से विकास कार्यों और सरकारी खर्च को सहारा मिलता है. इससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है.

3. कंपनियों के तिमाही नतीजों ने बाजार को दिया सहारा:

शेयर बाजार में तेजी की एक और वजह भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे हैं. वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद कई बड़ी भारतीय कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है. जब किसी कंपनी का मुनाफा बढ़ता है और कारोबार में सुधार दिखाई देता है, तो निवेशक उसके शेयर खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं. इससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में तेजी आती है और पूरे बाजार को भी मजबूती मिल सकती है. हालांकि सभी कंपनियों और सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं है. कुछ क्षेत्रों में अभी भी दबाव बना हुआ है.

4. LTCG टैक्स में कटौती की उम्मीद से बढ़ा निवेशकों का भरोसा:

भारतीय शेयर बाजार के लिए एक और सकारात्मक खबर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को लेकर सामने आई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान के बाद निवेशकों के बीच इस बात की उम्मीद बढ़ी है कि सरकार भविष्य में LTCG टैक्स में राहत देने पर विचार कर सकती है. दरअसल, जब कोई निवेशक शेयर या म्यूचुअल फंड में लंबे समय तक पैसा लगाकर मुनाफा कमाता है, तो नियमों के अनुसार उस पर LTCG टैक्स देना पड़ सकता है.

अगर सरकार इसमें कटौती करती है, तो लंबे समय तक निवेश करने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है. इससे शेयर बाजार में निवेश को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है. हालांकि, अभी इसे संभावित राहत के तौर पर ही देखना चाहिए. टैक्स में कटौती का कोई अंतिम फैसला घोषित होने तक निवेशकों को उम्मीद के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए.

5. विदेशी निवेशकों की बिकवाली के सामने घरेलू निवेशक बने ताकत:

पिछले कुछ समय से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ता है. लेकिन इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई है. इसके अलावा SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में लगातार पैसा लगाने वाले रिटेल निवेशक भी बाजार को सहारा दे रहे हैं.

SIP के माध्यम से हर महीने आने वाला निवेश बाजार में खरीदारी को बनाए रखने में मदद करता है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में बाजार की कमजोरी के कारण कई छोटे निवेशकों के पोर्टफोलियो में नुकसान भी देखने को मिला है.

6. भारत की घरेलू मांग बनी सबसे बड़ी ताकत:

वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत देश की घरेलू मांग है. भारत की बड़ी आबादी और बढ़ता मध्यम वर्ग कई उद्योगों के लिए बड़ा बाजार तैयार करते हैं. ऑटोमोबाइल, FMCG, रियल एस्टेट और डिजिटल सर्विस जैसे क्षेत्रों में लोगों की मांग अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है.

जब देश के भीतर लोग ज्यादा खरीदारी करते हैं, कंपनियों का कारोबार बढ़ता है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं. इससे अर्थव्यवस्था को बाहरी संकटों के बावजूद सहारा मिलता है.

क्या शेयर बाजार में तेजी आगे भी जारी रहेगी?

पिछले 5 दिनों की तेजी से निवेशकों को राहत जरूर मिली है, लेकिन इसे बाजार में पूरी तरह तेजी लौटने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी. सेंसेक्स और निफ्टी अभी भी अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे कारोबार कर रहे हैं. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिका के बाजारों में गिरावट, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले बड़े कारक होंगे.

निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों सामान्य हैं. केवल कुछ दिनों की तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है. किसी भी निवेश का फैसला कंपनी की स्थिति, बाजार के हालात और अपनी आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए. फिलहाल भारतीय शेयर बाजार की तेजी यह संकेत दे रही है कि घरेलू अर्थव्यवस्था और निवेशकों का भरोसा बाजार को सहारा दे रहा है. हालांकि यह तेजी कितने समय तक कायम रहती है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी.