Inspiring Journey: सफलता की राह में कई बार सबसे बड़ी चुनौती मुश्किल परीक्षा नहीं, बल्कि लोगों की सोच और उनके ताने होते हैं. मुंबई की सुरभि गांधी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. एक समय ऐसा था, जब उनके अपने ही उनकी पसंद और काबिलियत पर सवाल उठाते थे. उन्हें सीए की पढ़ाई छोड़कर ड्राइंग या पेंटिंग करने की सलाह तक दी गई. लेकिन सुरभि ने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.
सुरभि गांधी मुंबई के एक मारवाड़ी जैन परिवार से आती हैं. बचपन में उनका स्वभाव काफी शांत और अंतर्मुखी था. स्कूल में उनके ज्यादा दोस्त नहीं थे और वह अकेले समय बिताना पसंद करती थीं. हालांकि, इसी आदत ने उन्हें खुद को समझने और जीवन में कुछ अलग करने के बारे में सोचने का मौका दिया. उनके मन में अपनी अलग पहचान बनाने की इच्छा धीरे-धीरे मजबूत होती गई.
12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुरभि को यह स्पष्ट नहीं था कि आगे किस क्षेत्र में करियर बनाना है. उनके आसपास कई दोस्त चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे थे. उन्हें देखकर सुरभि ने भी सीए की पढ़ाई शुरू कर दी. शुरुआत में उन्हें अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा नहीं था, लेकिन फाउंडेशन परीक्षा पास करने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा.
सुरभि के लिए सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब एक रिश्तेदार ने उनकी पसंद और काबिलियत पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा था कि सुरभि फैशन में लगी रहती हैं और उन्हें सीए छोड़कर ड्राइंग या पेंटिंग करनी चाहिए. उनके मुताबिक, सुरभि से सीए नहीं हो पाएगा. यह बात सुरभि को चुभी, लेकिन उन्होंने इसे हार मानने की वजह बनाने के बजाय खुद को साबित करने की चुनौती के रूप में लिया.
सीए इंटरमीडिएट की तैयारी उनके लिए आसान नहीं रही. लंबी कक्षाओं और कठिन विषयों के बीच कई बार उन्हें अपने फैसले पर संदेह हुआ. पहली बार परीक्षा में असफल होने के बाद वह मानसिक दबाव से भी गुजरीं. इसके बाद उन्होंने तीन महीने तक बेहद अनुशासित दिनचर्या अपनाई. फोन और सोशल मीडिया से दूरी बना ली, सुबह चार बजे उठने लगीं और पढ़ाई पर ध्यान लगाने के लिए कमरे से अपना बेड तक हटा दिया.
लगातार मेहनत का नतीजा साल 2022 में सामने आया, जब सुरभि ने सीए इंटरमीडिएट के दोनों ग्रुप एक साथ पास कर लिए. सीए बनने के बाद उन्होंने फाइनेंस, फिटनेस और लाइफस्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया. वह Pro-Firo की संस्थापक बनीं और एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन दिया. उनका मानना है कि बड़ी सफलता के लिए सामान्य से अधिक प्रयास करना पड़ता है. वह युवाओं को खुद पर भरोसा रखने और दूसरों के तानों से न डरने का संदेश देती हैं.