सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक नाम खूब चर्चा में है- मेजर ऋषभ सिंह संब्याल. भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी रह चुके ऋषभ अब एक अलग वजह से सुर्खियां बटोर रहे हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू किया है, जिसके जरिए वे फॉलोअर्स से हर महीने तय फीस वसूल रहे हैं. यह कदम अब लोगों के बीच बहस का विषय बन गया है.
मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने भारतीय सेना में करीब 12 साल तक सेवाएं दीं. वे जाट रेजिमेंट का हिस्सा रहे और 4 पैरा स्पेशल फोर्सेस के लिए भी वॉलंटियर कर चुके हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी के तौर पर जब वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखे, तो उनकी पर्सनैलिटी ने लोगों का दिल जीत लिया. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स उन्हें ‘नेशनल क्रश’ तक कहने लगे थे.
अगस्त 2026 में समय से पहले सेना की नौकरी से रिटायरमेंट लेने के बाद ऋषभ ने डिजिटल कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में एंट्री ली. फौज में रहते हुए उनकी फिटनेस, आर्मी लाइफ और संघर्ष से जुड़ी रील्स को लाखों लोगों ने पसंद किया था. रिटायरमेंट के बाद उसी फैन फॉलोइंग को उन्होंने कमाई का जरिया बना लिया, जो अब हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है.
करीब 23 लाख यूजर्स ऋषभ सिंह संब्याल को इंस्टाग्राम पर फॉलो करते हैं. इनमें से 3,096 यूजर्स ने उनका पेड सब्सक्रिप्शन लिया हुआ है. एंड्रॉइड यूजर्स के लिए सब्सक्रिप्शन फीस 180 रुपये प्रति माह और आईफोन यूजर्स के लिए 199 रुपये प्रति माह तय की गई है, जिससे उनकी कमाई का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है.
प्लेटफॉर्म के आंकड़ों और थर्ड-पार्टी एनालिटिक्स के मुताबिक, प्लेटफॉर्म के टैक्स और कट को हटाने से पहले उनकी शुरुआती मासिक ग्रॉस कमाई करीब 5.97 लाख रुपये से 6.06 लाख रुपये के बीच आंकी जा रही है. सब्सक्रिप्शन लेने वाले फॉलोअर्स को एक्सक्लूसिव पोस्ट, रील्स, सीक्रेट अपडेट और सीधे बातचीत करने का मौका मिलता है.
हाल ही में ऋषभ सिंह संब्याल राज शमानी के पॉडकास्ट में भी नजर आए थे. वहां उन्होंने एडीसी पद से जुड़े कई दिलचस्प फैक्ट्स साझा किए, जिसने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ा दिया. दर्शकों ने उनकी बेबाकी और आर्मी अनुभवों को खूब सराहा.
जब यह बात फैली कि एक पूर्व आर्मी ऑफिसर अपनी रील्स दिखाने के लिए पैसे ले रहा है, तो लोगों की राय बंट गई. कुछ ने इसे फौज की गरिमा के खिलाफ बताया, तो कुछ का मानना है कि रिटायरमेंट के बाद हर नागरिक की तरह उन्हें भी अपनी आजीविका चुनने का पूरा हक है.