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Inspiring Journey: पिता की बीमारी ने बदली जिंदगी, चाय बेचकर IAS-IPS बनने की तैयारी कर रहीं 3 बहनें

गोरखपुर की तीन बहनों की जिंदगी में पिता की बीमारी के बाद आर्थिक संकट आया तो उन्होंने जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा. वर्तिका, वंदिता और अवंतिका ने परिवार का खर्च चलाने के लिए पहले ट्यूशन पढ़ाया और बाद में DDU गेट के सामने चाय की दुकान शुरू की.

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Edited By: Reepu Kumari
Inspiring Journey: पिता की बीमारी ने बदली जिंदगी, चाय बेचकर IAS-IPS बनने की तैयारी कर रहीं 3 बहनें
Courtesy: ChatGPT

Inspiring Journey of UPSC aspirants: कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें हालात जितना दबाते हैं, इंसान उतनी ही मजबूती से उन्हें पकड़ लेता है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की वर्तिका, वंदिता और अवंतिका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. पिता के बीमार पड़ने और नौकरी चले जाने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया. ऐसे समय में तीनों बहनों ने पढ़ाई छोड़ने के बजाय घर संभालने की जिम्मेदारी उठाई और कमाई का रास्ता तलाशा.

महाराजगंज निवासी रामसकल उपाध्याय एक जानी-मानी इंश्योरेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर थे. परिवार में उनकी तीन बेटियां वर्तिका, वंदिता और अवंतिका और बेटा शिवम है. सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन वर्ष 2017 में रामसकल पैरालाइज हो गए. इसके बाद नौकरी चली गई और इलाज में जमा पूंजी भी खर्च होने लगी. परिवार में कमाने वाले वे अकेले थे, इसलिए अचानक आई इस परेशानी का असर पूरे परिवार पर पड़ा.

जिम्मेदारी आई तो बेटियों ने संभाला मोर्चा

पिता की हालत बिगड़ने के बाद तीनों बहनों ने घर की आर्थिक स्थिति संभालने की कोशिश की. उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और छोटी-मोटी नौकरियां भी कीं. हालांकि, इससे मिलने वाली कमाई रोजमर्रा के खर्च और पिता की दवाओं के लिए पर्याप्त नहीं थी. इसी बीच बेटे शिवम की भी 12वीं के बाद पढ़ाई छूट गई. फिलहाल वह एक कंपनी में टेलीकॉलर के तौर पर काम कर रहे हैं. परिवार के सामने कमाई बढ़ाने की जरूरत थी.

8 हजार रुपये जुटाकर शुरू किया चाय का काम

परिवार में चाय की दुकान शुरू करने की बात सामने आई तो शुरुआत में मां को समाज की प्रतिक्रिया की चिंता थी. उन्हें डर था कि लोग मजाक बनाएंगे. आखिरकार परिवार ने फैसला लिया और किसी तरह 8 हजार रुपये जुटाए. इसके बाद DDU गेट के सामने चाय की दुकान शुरू की गई. दुकान का नाम ‘बिलीवर बिस्ट्रो’ यानी आस्थावानों का कैफे रखा गया. खास बात यह है कि सबसे छोटी बहन अवंतिका इसी DDU में बीए फर्स्ट ईयर की छात्रा हैं.

दिनभर दुकान, रात में किताबों के साथ तैयारी

दुकान शुरू होने पर पहले केवल चाय बेची जाती थी. ग्राहकों की संख्या बढ़ी तो मेन्यू में मैगी भी शामिल कर ली गई. दो बहनें सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक दुकान संभालती हैं. इसके बाद घर लौटकर पढ़ाई शुरू होती है. बड़ी बहन घर के काम और पिता की देखभाल के साथ रोजाना करीब 5-6 घंटे UPSC की तैयारी करती हैं. बाकी दोनों बहनें भी देर रात तक पढ़ती हैं और कई बार रात 2 बजे तक किताबों में जुटी रहती हैं.

तीनों की मंजिल अलग, सपना प्रशासनिक सेवा का

22 वर्षीय वर्तिका BSc पूरी कर चुकी हैं और DM बनना चाहती हैं. वह ऑनलाइन कक्षाएं लेती हैं और 8 से 10 घंटे पढ़ाई करने पर ध्यान देती हैं. वंदिता BSc सेकेंड ईयर में हैं और IPS ऑफिसर बनने का सपना देखती हैं. 19 वर्षीय अवंतिका DDU में फर्स्ट ईयर की छात्रा हैं और IAS बनना चाहती हैं. बड़ी बहन दोनों छोटी बहनों को नोट्स और उपयोगी YouTube वीडियो के जरिए पढ़ाई में मार्गदर्शन देती हैं.