DSP Jainendra Kumar Nigam: जिंदगी में कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए इंसान को अपनी हिम्मत बार-बार जुटानी पड़ती है. मध्य प्रदेश के भिंड जिले के जैनेंद्र कुमार निगम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. किसान परिवार में जन्मे जैनेंद्र के रास्ते में परेशानियां इतनी आईं कि पढ़ाई जारी रखना भी मुश्किल हो गया. परिवार पर संकट आया, खुद जेल जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से नजरें नहीं हटाईं. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और वे DSP बने.
उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष के कई पहलुओं का जिक्र किया है. उनकी कामयाबी बताती है कि मुश्किल हालात के बीच भी लक्ष्य के लिए प्रयास जारी रखे जा सकते हैं.
जैनेंद्र कुमार निगम मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता केशव कुमार निगम किसान हैं, जबकि मां कुसुम देवी गृहिणी हैं. उनके पिता खुद राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक परेशानियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उनका सपना अधूरा रह गया. इसके बाद उन्होंने बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. जैनेंद्र ने भी पिता की इस इच्छा को अपनी मंजिल बना लिया.
जैनेंद्र जब गांव से दूर इंदौर में रहकर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे, तब उनके परिवार के घर को आग लगा दिए जाने की घटना हुई. परिवार एक गंभीर सड़क हादसे से भी गुजरा. इन मुश्किलों के बीच जैनेंद्र मानसिक रूप से टूटने लगे थे. इसी दौरान दिल्ली में उन्होंने अपनी मां से DSP बनकर लौटने का वादा किया.
MPPSC की प्रारंभिक परीक्षा के समय जैनेंद्र जेल में थे. उनके मुताबिक, परीक्षा वाले दिन पुलिसकर्मी उन्हें हथकड़ी पहनाकर परीक्षा केंद्र लेकर पहुंचे. एक हाथ में हथकड़ी और दूसरे में पेन लिए परीक्षा देना उनके जीवन का बेहद कठिन अनुभव था. जेल में रहते हुए भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखने की कोशिश की. बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने इंदौर में दोबारा पढ़ाई शुरू की और अपनी लेखन क्षमता सुधारने के लिए 600 से 700 तक टेस्ट सीरीज लिखीं.
जैनेंद्र को कॉन्स्टेबल, मध्य प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक और शिक्षा वर्ग-1 जैसी परीक्षाओं में भी सफलता मिली. हालांकि, उनका लक्ष्य DSP बनना था, इसलिए उन्होंने नायब तहसीलदार के पद पर काम शुरू करने के बावजूद तैयारी जारी रखी. वर्ष 2024 में उन्हें सभी मामलों में बरी किए जाने की जानकारी दी गई. इसके बाद MPPSC के अंतिम परिणाम में उन्होंने 12वीं रैंक हासिल की और DSP बनने का सपना पूरा किया. उनकी यात्रा युवाओं को मुश्किल परिस्थितियों में भी मेहनत जारी रखने की प्रेरणा देती है.