दुनिया का सबसे बड़ा और करीब एक ट्रिलियन टन वजनी हिमखंड (आइसबर्ग) 'A23a' अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है. लगभग 40 वर्षों तक अंटार्कटिका के बर्फीले पानी में तैरने के बाद, यह विशालकाय हिमखंड पूरी तरह से टूटकर दक्षिण अटलांटिक महासागर में विलीन हो गया है. हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि हुई है कि कभी लंदन से दोगुने आकार और 3,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस बर्फीले पहाड़ के आखिरी अवशेष भी अब पूरी तरह पिघल चुके हैं.
A23a का सफर साल 1986 में शुरू हुआ था, जब यह अंटार्कटिका के 'फिल्चनर-रॉन आइस शेल्फ' से टूटकर अलग हुआ था. दिलचस्प बात यह है कि जब यह अलग हुआ, तब इस पर सोवियत संघ का एक रिसर्च स्टेशन 'द्रुझनाया 1' मौजूद था, जो इसके साथ ही बह गया था. इसके बाद के करीब 30 साल इस हिमखंड ने वेडेल सागर में एक ही जगह पर बिताए, क्योंकि इसका निचला हिस्सा समुद्र की सतह से मजबूती से टकराकर वहीं फंस गया था.
July 11, 2026 Saturday
— 이권상훈 Sang Hoon ( Peter Damiano) Lee (@hoonlee213) July 10, 2026
* The extraordinary life and quiet death of the world’s largest iceberg
Forty years after breaking away from Antarctica, the frozen colossus known as A23a died as it lived: drifting around the bottom of the globe, fascinating ardent observers, and…
साल 2022 में यह हिमखंड अपनी जगह से मुक्त हुआ और इसने दक्षिण अटलांटिक की ओर करीब 2,300 किलोमीटर की लंबी यात्रा शुरू की. इस यात्रा के दौरान यह उस समय वैश्विक चर्चा में आया जब यह 'साउथ जॉर्जिया द्वीप' पर मौजूद पेंगुइन अभयारण्य से टकराने की कगार पर पहुंच गया था. हालांकि, जैसे ही यह गर्म समुद्री धाराओं के संपर्क में आया, हवा और पानी की गर्मी ने इसे तेजी से पिघलाना शुरू कर दिया और यह धीरे-धीरे खत्म हो गया.
भले ही A23a का अस्तित्व खत्म हो गया हो, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह अनुसंधान का बड़ा जरिया रहा. ब्रिटिश अनुसंधान जहाज 'आरआरएस सर डेविड एटनबरो' ने इसके पिघलते पानी के नमूने लिए थे ताकि यह समझा जा सके कि ग्लेशियरों का मीठा पानी समुद्री जैव विविधता को कैसे प्रभावित करता है. इसके गायब होने के बाद अब वैज्ञानिक 'D15a' नामक दूसरे सबसे बड़े सक्रिय हिमखंड पर नजर रख रहे हैं.