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'अभी तक समझौते पर नहीं पहुंचे लेकिन....', अब खत्म होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? जेडी वेंस ने दिया हिंट

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर कुछ अहम जानकारी दी है. उन्होंने ज्लद ही अंतिम समझौते की संभावना जताई है.

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Edited By: Shanu Sharma
'अभी तक समझौते पर नहीं पहुंचे लेकिन....', अब खत्म होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? जेडी वेंस ने दिया हिंट
Courtesy: Pinterest

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत को लेकर जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान बीच अभी भी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की जा रही है. हम अभी भी इस पर काम कर रहे हैं और अंतिम समझौते की संभावना बनी हुई है.

वेंस ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को केंद्र में रखकर हो रही बातचीत अभी भी उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाई है, जहां कोई अंतिम फैसला लिया जा सके. उन्होंने बताया कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार और यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को लेकर अभी भी कुछ मतभेद बने हुए हैं.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने क्या कहा?

जेडी वेंस ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि राष्ट्रपति कब या क्या MOU पर हस्ताक्षर करेंगे. वह इसे स्वीकार करेंगे भी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस डील को लेकर काफी उम्मीद है. जेडी वेंस की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब सूत्रों के हवाले से खबरें आ रही हैं कि दोनों देश मौजूदा संघर्ष-विराम को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं. दोनों देशों की ओर से विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों में ढील देने की बात कर रहे हैं. अगर दोनों देशों के बीच बातचीत फाइनल हो जाती है और राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी मिल जाती है तो संघर्ष-विराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है.

परमाणु कार्यक्रमों पर बातचीत जारी

मिल रही जानकारी के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में होर्मुज पर लगे प्रतिबंधों में ढील, ईरान के तेल निर्यात को बढ़ावा, खाड़ी क्षेत्र में समुद्री पहुंच और तेहरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं. अगर दोनों देशों की बीच बातचीत सफल होती है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ज्लद ही अच्छी खबर आ सकती है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि समझौता होता है तो न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता भी आएगी. जेडी वेंस के बयान से यह समझ आ रहा है कि दोनों देश वॉशिंगटन के साथ समझौता करने के लिए इच्छुक है.