संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट में इस साल एक बड़ा और विवादित बदलाव देखने को मिला है. इस रिपोर्ट में पहली बार इजरायल और रूस के सशस्त्र बलों और सुरक्षा एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट सूची में शामिल किया गया है. यूएन द्वारा पेश किए गए 35 पन्नों की इस रिपोर्ट में कुल 12 देशों के 77 सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों पर यौन हिंसा या उसमें सहयोग का आरोप लगाया गया है.
UN की इस रिपोर्ट में 2024 की तुलना में 2025 में ऐसे मामलों में वृद्धि बताई गई है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इजरायल की रक्षा सेना यानी IDF, जेल प्रशासन, विशेष बलों और पुलिस इकाइयों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार गाजा और वेस्ट बैंक में हिरासत में लिए गए 14 पुरुषों, 7 महिलाओं, 9 लड़कों और 1 लड़की के साथ यौन हिंसा की जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक इनके साथ रेप, गैंग रेप और यौन उत्पीड़न किया गया. जिसमें से 9 मामले गंभीर बताए जा रहे हैं. इनमें से ज्यादातर गाजा के रहने वाले हैं. इनमें से 13 मामले 2025 के बताए जा रहे हैं. हालांकि इजरायल ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और संयुक्त राष्ट्र पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है.
इस रिपोर्ट में यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी सशस्त्र बलों पर भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्ट में रूस नियंत्रित क्षेत्रों में 300 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें ज्यादातर पीड़ित युद्धबंदी या नागरिक बंदी हैं. रूस की ओर से भी इन आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है और उनकी ओर से UN महासचिव को पत्र लिखने की घोषणा की गई है. UN में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने रिपोर्ट की कड़ी निंदा की.
उन्होंने कहा कि अब हमारा एंटोनियो गुटेरेस से कोई लेना-देना नहीं है. गुटेरेस ने इजरायल को उसी सूची में डाल दिया है जिसमें हमास, ISIS जैसे आतंकवादी संगठन शामिल हैं. रूस के राजदूत वसीली नेबेंजिया ने भी इन आरोपों को मनगढ़ंत झूठ करार दिया और यूक्रेनी बलों द्वारा रूसी बंदियों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं. UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पिछले साल ही इजरायल और रूस को चेतावनी दी थी कि यदि शिकायतें बनी रहीं तो उन्हें सूची में शामिल किया जाएगा. जिसके बाद इस साल उन्हें शामिल कर दिया गया है. रिपोर्ट में दोनों देशों द्वारा UN जांच टीमों को पहुंच न देने का भी जिक्र है.