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कारगिल विजय दिवस 2026: हर भारतीय के दिल को छू लेते हैं कैप्टन मनोज पांडेय के आखिरी शब्द, जानें परिवार से क्या हुई थी बातचीत

26 जून 1999 को कारगिल युद्ध चरम पर था. कैप्टन मनोज पांडेय उस दिन अपना जन्मदिन मना रहे थे. खराब सेटेलाइट कनेक्शन के बीच परिवार से छोटी सी बात हुई. मनोज ने कहा- 'आप लोग चिंता मत करना, मैं दुश्मन पर तिरंगा लहराकर वापस आऊंगा या फिर तिरंगे में लिपटकर.'

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Edited By: Antima Pal
कारगिल विजय दिवस 2026: हर भारतीय के दिल को छू लेते हैं कैप्टन मनोज पांडेय के आखिरी शब्द, जानें परिवार से क्या हुई थी बातचीत
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लखनऊ: कारगिल विजय दिवस पर देश उन वीर सपूतों को याद कर रहा है जिन्होंने मां-भारती की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. इनमें लखनऊ के कैप्टन मनोज पांडेय का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है. परमवीर चक्र से सम्मानित इस शहीद ने अपनी आखिरी बातचीत में मां से जो शब्द कहे थे, वे आज भी हर भारतीय के दिल को छू लेते हैं.

कैप्टन मनोज पांडेय के आखिरी शब्द

26 जून 1999 को कारगिल युद्ध चरम पर था. कैप्टन मनोज पांडेय उस दिन अपना जन्मदिन मना रहे थे. खराब सेटेलाइट कनेक्शन के बीच परिवार से छोटी सी बात हुई. मनोज ने कहा- 'आप लोग चिंता मत करना, मैं दुश्मन पर तिरंगा लहराकर वापस आऊंगा या फिर तिरंगे में लिपटकर.' ये उनके परिवार से आखिरी बातचीत थी. ठीक एक सप्ताह बाद 3 जुलाई 1999 को खालूबार क्षेत्र में दुश्मन के बंकरों पर हमला करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हो गए.

कैप्टन मनोज पांडेय अल्फा कंपनी की कमान संभाल रहे थे. उन्होंने दुश्मन के तीन बंकरों को ध्वस्त कर दिया था और चौथे की ओर बढ़ रहे थे, तभी गोली लगने से उनका बलिदान हो गया. उनकी वीरता देखकर उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया.

परिवार और सपना

मनोज पांडेय यूपी सैनिक स्कूल से पढ़े थे. आज वह स्कूल उनके नाम से जुड़ा हुआ है. पिता बोर्ड पर बेटे का नाम देखकर गर्व से भर जाते हैं. उन्होंने बताया कि सेना में चयन के दौरान जब मनोज से पूछा गया कि वे सेना में क्यों जाना चाहते हैं, तो जवाब था – 'परमवीर चक्र पाना है.' और उन्होंने अपना सपना पूरा कर दिखाया.

परिवार के अनुसार मनोज ने छुट्टी बीच में छोड़कर अपनी यूनिट जॉइन की थी. बीमार पत्नी को घर पर छोड़कर वे रणभूमि के लिए रवाना हुए. संचार नेटवर्क बेहतर बनाने के लिए भी उन्होंने विशेष प्रयास किए थे. आज कारगिल विजय दिवस 2026 पर लखनऊ समेत पूरे देश में कैप्टन मनोज पांडेय जैसे वीरों को याद किया जा रहा है. उनके बलिदान ने साबित कर दिया कि भारतीय सैनिक कितने साहसी और देशभक्त होते हैं.

पिता कहते हैं कि बेटे पर गर्व है. पूरा परिवार और पूरा लखनऊ शहर उनके नाम पर गर्व करता है. कैप्टन मनोज पांडेय की कहानी हर युवा को देशसेवा के लिए प्रेरित करती है. कारगिल युद्ध में लखनऊ के कई जांबाज शहीद हुए. उनकी याद में हर साल 26 जुलाई को पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. शहीदों के परिवार आज भी गर्व के साथ उनकी यादें संजोए रखे हैं.