व्हाइट हाउस के कारोबार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत और ब्रिक्स देशों पर तीखा हमला बोला है. इस बार उन्होंने ब्रिक्स देशों को "वैम्पायर" कहकर संबोधित किया. एक टीवी इंटरव्यू में नवारो ने ब्रिक्स गठबंधन की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये देश "अमेरिका को बिक्री के बिना टिक नहीं सकते." उन्होंने आगे कहा, "...जब वे अमेरिका को अपने एक्सपोर्ट बेचते हैं, तो वे वैम्पायर की तरह हमारे खून को चूसते हैं, अपने अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों के साथ." नवारो ने यह भी दावा किया कि ब्रिक्स देश ऐतिहासिक रूप से "एक-दूसरे से नफरत करते हैं और एक-दूसरे को मारते हैं."
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीटर नवारो ने भारत और चीन के बीच संबंधों को भी निशाने पर लिया. उन्होंने दावा किया कि दोनों देश "दशकों से युद्ध में हैं." यह बयान उस समय आया जब भारत और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर नवारो लगातार हमलावर रुख अपना रहे हैं. उन्होंने भारत पर रूस से तेल खरीदकर "मुनाफा कमाने" और "रूसी युद्ध मशीन को पोषित करने" का आरोप लगाया.
I don’t see the BRICS alliance lasting.
They’ve long hated each other—and none survive without selling to the United States. pic.twitter.com/0vqNq8fZaEAlso Read
— Peter Navarro (@RealPNavarro) September 8, 2025
ब्रिक्स गठबंधन का विस्तार
ब्रिक्स गठबंधन की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी. 2024 में यह गठबंधन मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के साथ और विस्तारित हुआ. नवारो के बयान ने इस गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं. नवारो ने अब ब्रिक्स समूह के उन देशों पर निशाना साधा है, जिनका भारत भी एक हिस्सा है.
नवारो पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान
ऐसा पहली बार नहीं है जब नवारो ने इस तरह की तीखी टिप्पणियां की हैं. मई में, उन्होंने चीन के खिलाफ इसी तरह का "वैम्पायर" बयान दिया था. टेलीग्राफ के हवाले से नवारो ने कहा था, "अगर चीनी वैम्पायर अमेरिकी खून नहीं चूस सकता, तो वह यूके और ईयू का खून चूसेगा." उन्होंने यूके को चेतावनी दी थी कि वह चीनी सामानों के लिए "डंपिंग ग्राउंड" न बने. यह बयान उस समय आया था जब अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ विवाद चरम पर था, जिसमें ट्रंप ने चीनी सामानों पर 245% टैरिफ की घोषणा की थी.
भारत पर टैरिफ और एक्स पर फैक्ट-चेक
नवारो के भारत विरोधी बयानों का सिलसिला तब और तेज हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 अगस्त को भारत के इम्पोर्ट पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल शुल्क 50% हो गया. यह टैरिफ भारत के रूस के साथ तेल कारोबार के लिए दंड के रूप में लगाया गया. नवारो ने एक एक्स पोस्ट में दावा किया कि भारत "मुनाफे के लिए" रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन इस दावे को एक्स कम्युनिटी ने फैक्ट-चेक कर खारिज कर दिया. एलन मस्क ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "इस मंच पर लोग नैरेटिव तय करते हैं. आप हर पक्ष के तर्क सुनते हैं. कम्युनिटी नोट्स सभी को सुधारते हैं, कोई अपवाद नहीं."
भारत ने कुछ यूं दिया जवाब
भारत ने नवारो के बयानों को "गलत और भ्रामक" करार देते हुए खारिज किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी साझा हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है. भारत ने साफ किया कि उसका तेल कारोबार ऊर्जा सुरक्षा के लिए है, न कि केवल मुनाफे के लिए.