menu-icon
India Daily

'ट्रिगर दबाने को तैयार हूं', होमुर्ज के बाद क्या बंद होने वाला है ये दूसरा स्ट्रेट? ईरान की लड़ाई में हूती विद्रोहियों की एंट्री

मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव और भी ज्यादा बढ़ सकता है क्योंकि इस लड़ाई में अब हूती विद्रोही के भी शामिल होने की उम्मीद बढ़ गई है. उन्होंने लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाले स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी है.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
'ट्रिगर दबाने को तैयार हूं', होमुर्ज के बाद क्या बंद होने वाला है ये दूसरा स्ट्रेट? ईरान की लड़ाई में हूती विद्रोहियों की एंट्री
Courtesy: X (@Hazel4520t, @RT_India_news)

नई दिल्ली: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध क्या अभी और बढ़ने वाला है? क्या इस युद्ध में अब यमन के हूती विद्रोही भी शामिल होने वाले हैं? ईरान के सबसे करीबी सहयोगी कहे जाने वाला यह संगठन अभी तक इस युद्ध का हिस्सा नहीं बना है, लेकिन अब उनकी ओर से धमकियां तेज हो गई है.

हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने कहा है कि उनकी उंगलियां ट्रिगर पर हैं. अगर हालात बिगड़े तो वे किसी भी पल कार्रवाई कर सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बाब अल-मंडेब स्ट्रेट पर भी असर पड़ सकता है. यह वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा झटका होगा.

क्या है हूती विद्रोहियों का प्लान?

इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक हूती और अन्य समूह अलर्ट पर हैं, हूती तेहरान की लड़ाई में शामिल हो सकते हैं. जिसके कारण बाब अल-मंडेब बंद होने का खतरा है. यह जलडमरूमध्य लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है. इसका नाम 'गेट ऑफ टियर्स' है. यहां सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 29 किलोमीटर चौड़ा है.

हूती की ओर से पहले भी इस रास्ते पर हमले किए जा चुके हैं. गाजा युद्ध के दौरान 2023-2025 में उन्होंने 100 से ज्यादा जहाजों पर ड्रोन, मिसाइल और तेज नौकाओं से हमले किए. जिसके कारण कई जहाज डूब गए और शिपिंग कंपनियों को अफ्रीका के चक्कर लगाने लगीं. इससे व्यापार में देरी और खर्च बढ़ा था. अब ईरान पर हमलों के बाद हूती फिर सक्रिय हो सकते हैं.

स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज का क्या है हाल?

इस रास्त को यूरोप व्यापार के लिए काफी महत्वपूर्ण बताया जाता है. यहां से वैश्विक व्यापार का 12% हिस्सा गुजरता है. तेल का 10% और एलएनजी की बड़ी खेप यहीं से आती है. स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज के बाद अब अगर यह रास्ता बंद होता है तो जहाजों को केप ऑफ गुड होप से जाना पड़ेगा. जिससे यात्रा की अवधी 15 दिनों तक बढ़ सकती है और लागत और बीमा प्रीमियम आसमान छू लेंगे. र्मुज पहले से ही प्रभावित है, ईरान ने वहां जहाज रोक लिया है. जिसके कारण उस रास्ते पर ट्रैफिक 97% कम हो गया, अगर बाब अल-मंडेब भी बंद हुआ तो तेल की कीमतें भारी बढ़ सकती हैं. इससे वैश्विक सप्लाई चेन बिगड़ जाएगी.