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'व्यापारियों का बसाया हुआ आइलैंड, जिसने निगल ली हसीना की कुर्सी', क्यों छोटे से द्वीप के पीछे पड़ा US?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि अमेरिका पर सेंट मार्टिन द्वीप पर कब्जा चाहता है. उन्होंने जब इस द्वीप को सौंपने से इनकार कर दिया तो अमेरिका ने उन्हें हटाने की साजिश रची. द इकॉनोमिक टाइम्स के हवाले से शेख हसीना ने कहा है कि अगर मैंने सेंट मार्टिन द्वीप की संप्रभुता सौंप दी होती तो मैं सत्ता में बनी रह सकती थी लेकिन मैंने मुल्क का सौदा नहीं किया.

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'व्यापारियों का बसाया हुआ आइलैंड, जिसने निगल ली हसीना की कुर्सी', क्यों छोटे से द्वीप के पीछे पड़ा US?
Courtesy: Social Media

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने अपनी सरकार के पतन के बाद पहली प्रतिक्रिया दी है. इसमें उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है.अपने करीबी सहयोगियों के माध्यम से मीडिया को भिजवाए एक संदेश में हसीना ने आरोप लगाया है कि अमेरिका को सेंट मार्टिन द्वीप नहीं सौंपने के कारण उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि 'मैंने इस्तीफा दे दिया ताकि मुझे लाशों का ढेर नहीं देखना पड़े, मैं सत्ता में बनी रह सकती थी यदि मैंने सेंट मार्टिन द्वीप की संप्रभुता अमेरिका के सामने समर्पित कर दी होती'.


ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका सुदूर बंगाल की खाड़ी में स्थित एक छोटे से द्वीप के पीछे क्यों पड़ा है, इस छोटे से द्वीप का इतना महत्व क्यों हैं. जिसके लिए अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल कर तख्तापलट करवाना पड़ा.

सेंट मार्टिन द्वीप का इतिहास

दरअसल सेंट मार्टिन द्वीप बंगाल की खाड़ी के उत्तर पूर्वी भाग में एक छोटा आइलैंड है जो केवल 3 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जो कॉक्स बाजार टेकनाफ प्रायद्वीप के सिरे से लगभग 9 किमी दक्षिण में है और बांग्लादेश के सबसे दक्षिणी छोर का निर्माण करता है. हजारों साल पहले यह द्वीप टेकनाफ प्रायद्वीप का ही विस्तारित हिस्सा हुआ करता था. टेकनाफ प्रायद्वीप का कुछ हिस्सा बाद में जलमग्न हो गया और इस प्रकार उसका दक्षिणी हिस्सा बांग्लादेश की मुख्य भूमि से अलग हो गया और एक द्वीप बन गया. इस द्वीप को सबसे पहले 18 वीं शताब्दी में अरब के व्यापारियों ने बसाया था. जिसका नाम जजीरा रखा गया था.

ब्रिटिश शासन के दौरान इस द्वीप का नाम चटगांव के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के नाम पर सेंट मार्टिन द्वीप रखा गया था. स्थानीय लोग इस द्वीप को बंगाली भाषा में नारिकेल जिंजिरा कहते हैं, जिसका अंग्रेजी में मतलब है, कोकोनट आइलैंड. यह बांग्लादेश का एकमात्र कोरल आइलैंड(मूंगा द्वीप) है.

क्यों इस द्वीप के पीछे पड़ा है अमेरिका?

अमेरिका इस द्वीप पर एक एयर बेस बनाना चाहता है, जो उसे बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में अपना प्रभुत्व स्थापित करने में सक्षम बना सके.

यह द्वीप जैव विविधता, पर्यावरण, मत्स्य पालन, पर्यटन सहित कई कारणों से महत्वपूर्ण है. जियो पॉलिटिक्स में भी इस क्षेत्र का बहुत अधिक महत्व है.

क्या है सेंट मार्टिन द्वीप की भौगोलिक स्थिति?

सेंट मार्टिन की भौगोलिक स्थिति ऐसी हैं, जहां दुनिया में कहीं से भी समुद्र मार्ग के द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है. साथ ही यह एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है. अगर इसे राजनीतिक नजरिए से देखें तो सेंट मार्टिन द्वीप से बंगाल की खाड़ी और आसपास के पूरे समुद्री इलाके पर नजर रखी जा सकती है. इस हिसाब से यह द्वीप बांग्लादेश के बहुत जरूरी है.