अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगुवाई में अमेरिकी सैनिकों द्वारा लगातार ईरान पर हमला किया जा रहा है. हालांकि उनके इस फैसले को कई अमेरिकी समर्थन नहीं दे रहे हैं. यूरोप में भी इस युद्ध के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है. इसी क्रम में अमेरिका और यूरोप के कई शहरों में 28 मार्च को 'नो किंग्स' नाम की रैलियां शुरू की गई. इन रैलियों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे.
नो किंग्स रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों द्वारा ईरान में चल रहे युद्ध और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाया जा रहा है. आयोजकों का अनुमान है कि इसमें 90 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए हैं. कुछ लोगों ने अमेरिकी झंडे उल्टे पकड़ रखे थे, इसे विरोध का तरीका माना जाता है.
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ यह तीसरा नो किंग्स रैली निकाली गई, जो यह दर्शाता है कि वहां की जनता ट्रंप की नीतियों से खुश नहीं है. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने हमेशा अपनी नीतियो को अमेरिका के पक्ष में बताया है. पिछले साल दो बार जून और अक्टूबर हुए इस रैली में लगभग 50 लाख से 70 लाख तक लोग शामिल हुए थे. लेकिन इस बार आयोजकों का अनुमान है कि 90 लाख से ज्यादा लोग इन रैलियों में हिस्सा ले सकते हैं. इस दौरान महिलाएं 'कैट्स अगेंस्ट ट्रंप' के बैनर लेकर पहुंचीं.
वाशिंगटन डीसी में सैकड़ों लोग लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक मार्च निकालकर पहुंचे. उन्होंने अपने हाथों में 'ताज उतार दो, जोकर' और 'सत्ता बदलाव घर से शुरू होता है' पोस्टर लिए थे. भीड़ से लगातार आवाज आ रही थी कि हमें कोई राजा नहीं चाहिए. प्रदर्शनकारियों की शिकायतों में ट्रंप प्रशासन द्वारा आव्रजन नियमों की सख्ती, ईरान युद्ध और ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती शामिल थी. मिनेसोटा में संघीय एजेंटों की कार्रवाई को लेकर खास नाराजगी थी.
अमेरिका के अलावा यूरोप में भी रैलियां हुईं. रोम में हजारों लोगों ने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के खिलाफ नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों का विरोध किया. लंदन, पेरिस और अन्य देशों में 'नो टायरेंट्स' के नाम से रैली निकाले गए. हालांकि व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अबीगैल जैक्सन ने इन रैलियों को 'वामपंथी फंडिंग नेटवर्क' का नतीजा करार दिया.