नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई. इसी उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान ने सक्रिय कूटनीति दिखाते हुए ईरान से एक महत्वपूर्ण समझौता हासिल कर लिया है. इस डील के तहत पाकिस्तान के 20 जहाजों को होर्मुज से गुजरने की मंजूरी मिली है. विदेश मंत्री इशाक डार ने इसे शांति का संकेत बताते हुए कहा कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को कम करने और ऊर्जा प्रवाह बहाल करने में मदद करेगा.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने घोषणा की कि ईरान हर दिन उसके दो जहाजों को होर्मुज से गुजरने देगा. उन्होंने इसे सिर्फ व्यापारिक रूट की बहाली नहीं, बल्कि क्षेत्र में संतुलन बनाने वाला फैसला बताया. उनके बयान में अमेरिकी उपराष्ट्रपति और ईरानी विदेश मंत्री को टैग करना इस डील की राजनीतिक गहराई को दर्शाता है. यह संकेत है कि पाकिस्तान इस मौके को व्यापक कूटनीतिक प्रभाव के रूप में देख रहा है.
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को एक तरह के हाई-सेक्योरिटी चेकपॉइंट में बदल दिया है. अब किसी भी जहाज को यहां से गुजरने से पहले अपने कार्गो, कर्मचारियों और गंतव्य की पूरी जानकारी देनी होती है. क्लीयरेंस कोड मिलने के बाद ही जहाज को आगे बढ़ने दिया जाता है. कई जहाजों से इस प्रक्रिया के बदले भारी शुल्क वसूले जाने की भी खबरें हैं, जिससे समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ.
I am pleased to share a great news that the Government of Iran has agreed to allow 20 more ships under the Pakistani flag to pass through the Strait of Hormuz; two ships will cross the Strait daily.
This is a welcome and constructive gesture by Iran and deserves appreciation. It…— Ishaq Dar (@MIshaqDar50) March 28, 2026Also Read
युद्ध शुरू होने के बाद से इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में लगभग 90% की गिरावट आई है. एक महीने में सिर्फ 150 जहाज होर्मुज से निकल पाए, जबकि आम दिनों में यह आंकड़ा कई गुना अधिक होता है. इसके कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को मिला यह विशेष अनुमति पत्र उसकी ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका, ईरान और तुर्किये के साथ लगातार संवाद बनाए रखा. सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बात की, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति से संपर्क साधा. पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ईरान द्वारा पाकिस्तान के लिए ‘इनाम’ जैसा है, जिसने तनावपूर्ण हालात में बातचीत के रास्ते खोलने का प्रयास किया.