अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है. ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से इस बात की जानकारी दी गई, जिसमें बताया गया कि यह कार्रवाई कमर्शियल जहाजों पर हुए हमले के जवाब मे था.
अमेरिका का आरोप है कि ईरान की ओर से किए गए हमले गैर जरूरी, खतरनाक और युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन है. जिसके जवाब में अमेरिका ने हमला किया है. अमेरिका का कहना है कि , इन हमलों का उद्देश्य ईरान को उसकी कथित आक्रामक गतिविधियों की कीमत चुकाने के लिए मजबूर करना था.
अमेरिकी अधिकारी का दावा है कि बुधवार को किए गए सैन्य कार्रवाई में ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम और कई एंटी शिप क्रूज मिसाइलों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का दावा है कि ये सभी ठिकाने समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे. ईरान के सरकारी मीडिया ने दक्षिणी हिस्सों में कई धमाकों की पुष्टि की है.
रिपोर्ट के अनुसार, सिरिक शहर में सात धमाकों की आवाज सुनी गई, जबकि ताहरौई पियर क्षेत्र में छह प्रोजेक्टाइल गिरने की सूचना मिली. इसके अलावा केशम द्वीप और बंदर अब्बास में भी विस्फोटों की खबर सामने आई. बाद में सरकारी मीडिया ने बताया कि सिरिक के कमर्शियल पियर पर एक प्रोजेक्टाइल गिरने से कई लोग घायल हुए हैं.
ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार, ओमान के तट के पास एक टैंकर पर प्रोजेक्टाइल लगने से उसमें आग लग गई. दो अन्य जहाज भी क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन वे अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहे. संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, अप्रैल के आखिर के बाद एक ही दिन में समुद्री जहाजों पर यह सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.
घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने ईरानी तेल पर दी गई 60 दिन की प्रतिबंध राहत भी वापस ले ली. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि होर्मुज में ईरान की कथित गतिविधियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. इससे पहले इस लाइसेंस के तहत 21 अगस्त तक ईरानी तेल के उत्पादन, आपूर्ति और बिक्री को सीमित छूट दी गई थी.